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ईरान में भारतीय छात्रों के पासपोर्ट रोके जाने पर जेकेएसए ने विदेश मंत्रालय को लिखा पत्र, हस्तक्षेप की मांग

 

नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने रविवार को विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर ईरान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की स्थिति पर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।

एसोसिएशन ने बताया कि ईरान में भारतीय छात्रों को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनमें विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रों के पासपोर्ट रोके जाना, संकट के समय भी जबरन शैक्षणिक गतिविधियां कराना और तेजी से बढ़ता क्षेत्रीय व भू-राजनीतिक तनाव शामिल है। इन सब कारणों से भारतीय छात्र डरे हुए, फंसे हुए और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

विदेश मंत्री को लिखे पत्र में एसोसिएशन ने कहा कि अधिकांश भारतीय छात्र कश्मीर से हैं। उन्होंने जेकेएसए की ईरान इकाई को बताया है कि तेहरान स्थित शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज लंबे समय से बंद है, लेकिन इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के पासपोर्ट वापस नहीं कर रहा है। छात्र भारत लौटना चाहते हैं, लेकिन पासपोर्ट न मिलने के कारण वे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। इससे छात्रों और भारत में उनके परिवारों में गहरी चिंता और मानसिक तनाव बढ़ गया है।

जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहमी ने कहा कि कई दिनों से विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदारी से बच रहा है और पासपोर्ट लौटाने में लगातार देरी कर रहा है। इसके कारण छात्र अपनी इच्छा के खिलाफ वहां फंसे हुए हैं। उन्होंने इसे एक गंभीर मानवीय समस्या के प्रति लापरवाह और असंवेदनशील रवैया बताया, जो मौजूदा अस्थिर हालात में और भी चिंताजनक है। छात्रों ने बताया कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद प्रशासन ने कोई संवेदनशीलता या तत्परता नहीं दिखाई।

नासिर खुहमी ने कहा कि इस पूरे मामले को तेजी से बढ़ते क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय तनाव के संदर्भ में देखना चाहिए। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अमेरिका के युद्धपोतों की तैनाती, ईरानी अधिकारियों के कड़े बयान, आंतरिक अशांति, संचार बाधाएं, सैन्य तैयारियां और वैश्विक शक्तियों के बीच तीखी बयानबाजी की खबरें लगातार आ रही हैं। ऐसे हालात में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और अचानक हालात बिगड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

एसोसिएशन ने एक और गंभीर चिंता जताई है। भारतीय छात्रों ने बताया कि ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज और शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में सेमेस्टर परीक्षाएं कराई जा रही हैं, जबकि ईरान के अधिकांश विश्वविद्यालयों ने मौजूदा हालात को देखते हुए कम से कम 24 मार्च तक परीक्षाएं और शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित कर दी हैं।

ऐसे समय में जब छात्र मानसिक तनाव में हैं, पासपोर्ट न होने के कारण आवाजाही नहीं कर पा रहे हैं और किसी भी समय हालात बिगड़ने का डर है, उन्हें परीक्षा देने के लिए मजबूर करना न तो उचित है और न ही मानवीय। इससे छात्रों की परेशानी और बढ़ गई है।

एसोसिएशन ने कहा कि पासपोर्ट रोके जाना, संस्थानों की जवाबदेही की कमी, संकट के समय परीक्षाएं कराने की जिद और क्षेत्रीय अस्थिरता—इन सबने मिलकर भारतीय छात्रों को बेहद असुरक्षित और मानसिक रूप से टूटे हुए हालात में पहुंचा दिया है।

नासिर खुहमी ने विदेश मंत्रालय से अपील की कि वह तुरंत ईरानी अधिकारियों, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास और संबंधित विश्वविद्यालयों से बात कर छात्रों के पासपोर्ट बिना देरी के वापस दिलवाए, ताकि उनकी आवाजाही हो सके।

एसोसिएशन ने यह भी मांग की कि भारतीय दूतावास के साथ मिलकर शैक्षणिक दबाव का मुद्दा उठाया जाए और परीक्षाएं स्थगित करने तथा छात्रों को शैक्षणिक राहत देने की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा, मौजूदा अस्थिर हालात को देखते हुए जरूरत पड़ने पर छात्रों की सुरक्षित वापसी (निकासी) की योजना भी तैयार रखने की मांग की गई है।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी