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ईरान के आईआरजीसी ने दक्षिणी हवाई क्षेत्र में अमेरिकी एफ-16 व एमक्यू-9 ड्रोन को मार गिराने का किया दावा

 

तेहरान, 29 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के दक्षिणी हवाई क्षेत्र में एक अमेरिकी एफ-16 फाइटिंग फाल्कन और एक एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को निशाना बनाया है।

अपने आधिकारिक समाचार माध्यम सेपाह न्यूज़ पर जारी बयान में आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिकी फाइटर जेट और ड्रोन को उसकी नौसेना और एयरोस्पेस डिवीजन द्वारा संयुक्त जवाबी मिसाइल और ड्रोन अभियानों के दौरान निशाना बनाया गया। ये अभियान अमेरिका और इज़रायल से संबंधित भारी उद्योगों के खिलाफ चलाए गए थे, जैसा कि शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने रिपोर्ट किया।

इसमें यह भी जोड़ा गया कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी स्वीकार किया है कि उसका एफ-16 फाइटिंग फाल्कन निशाना बनाया गया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सेंटकॉम ने यह जानकारी दी।

“अमेरिकी वायु सेना का एक एफ-16 फाइटिंग फाल्कन ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के समर्थन में एक लड़ाकू उड़ान के बाद मध्य पूर्व के एक बेस पर सुरक्षित उतर गया।”

इसके अलावा, आईआरजीसी ने शनिवार को दावा किया कि उसने संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में स्थित एक यूक्रेनी एंटी-ड्रोन उपकरण गोदाम को नष्ट कर दिया, जिसका उपयोग अमेरिकी बलों की सहायता के लिए किया जा रहा था।

ईरान की मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोलफघारी ने कहा कि दुबई में एक गोदाम, जिसमें यूक्रेनी एंटी-ड्रोन सिस्टम रखे गए थे और जहां 21 यूक्रेनी नागरिक मौजूद थे, उसे ईआरजीसी की वायु सेना और नौसेना द्वारा संयुक्त अभियान में निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया।

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हियोरही तिखी ने इस जानकारी को “झूठ” बताते हुए खारिज कर दिया, जैसा कि इंटरफैक्स-यूक्रेन समाचार एजेंसी ने शनिवार को रिपोर्ट किया।

“यह जानकारी वास्तविकता से मेल नहीं खाती। यह फर्जी है,” इंटरफैक्स-यूक्रेन ने यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तेम उमेरोव के एक प्रवक्ता के हवाले से कहा।

यह घटनाक्रम 28 फरवरी से ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच सामने आया है, जिसके जवाब में ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों ने मध्य पूर्व में इज़राइली और अमेरिकी हितों पर हमले किए।

--आईएएनएस

पीएम