×

ईरान ने ट्रम्प प्रशासन को संकेत दिया, वीडियो में देंखे जेडी वेंस के साथ बातचीत को प्राथमिकता

 

ईरान ने संकेत दिया है कि वह पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चुनी हुई टीम के बजाय जेडी वेंस के साथ बातचीत को प्राथमिकता देगा। अमेरिकी समाचार चैनल CNN के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि ईरान वेंस को युद्ध विरोधी नेता मानता है और उनके साथ संवाद करना अधिक उचित समझता है।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/OCSnkYHfijQ?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/OCSnkYHfijQ/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह ट्रम्प के दामाद और पूर्व सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ के साथ किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होना चाहता। ईरान का तर्क है कि पूर्व टीम के साथ बातचीत चल रही थी, तभी अमेरिका और इजराइल ने एक संयुक्त हमला किया था, जिससे ईरान को यह भरोसा नहीं रहा कि पुरानी टीम के साथ कोई निष्पक्ष वार्ता हो सकती है।

CNN के अनुसार, एक राजनयिक सूत्र ने कहा, "पुरानी टीम के साथ बातचीत की कोई संभावना नहीं है। ईरान को लगता है कि बातचीत का प्रस्ताव केवल अमेरिका और इजराइल के लिए समय खरीदने की एक चाल है, ताकि वे फिर से हमला कर सकें।"

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का यह कदम अमेरिका के भीतर राजनीतिक मतभेदों और मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव का संकेत है। जेडी वेंस, जो कि ट्रम्प समर्थक हैं, लेकिन युद्ध के मामलों में अपेक्षाकृत शांतिप्रिय दृष्टिकोण रखते हैं, उन्हें ईरान एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रहा है।

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। 2018 में ट्रम्प प्रशासन द्वारा इरानी परमाणु समझौते (JCPOA) से वापसी के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव लगातार बढ़ता गया। ईरान की यह रणनीति न केवल संभावित वार्ता के लिए अपने हितों को सुरक्षित करने की कोशिश है, बल्कि अमेरिका और इजराइल की नीतियों के प्रति अपनी नाराजगी भी दर्शाती है।

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, ईरान इस समय किसी भी वार्ता में प्रवेश करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अमेरिकी पक्ष वास्तविक वार्ता के लिए गंभीर है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि पुरानी टीम के साथ बातचीत केवल दिखावा था और इसमें कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सकता था।

इस प्रकार का रुख अमेरिका में राजनीतिक हलकों और मीडिया में भी चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वार्ता वेंस के माध्यम से होती है, तो यह मध्यपूर्व में तनाव कम करने और ईरान-अमेरिका संबंधों में नई दिशा प्रदान करने की संभावना रखती है। हालांकि, इसके लिए दोनों पक्षों के बीच विश्वास निर्माण और कूटनीतिक सहमति की आवश्यकता होगी।

ईरान की ओर से यह संदेश साफ है कि वह केवल उन अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ संवाद करना चाहता है, जिनके दृष्टिकोण और नीति युद्ध विरोधी हैं और जो उसके हितों का सम्मान करते हैं। इस फैसले से अमेरिका के कूटनीतिक विकल्प सीमित हो सकते हैं, और इजराइल के साथ उसकी रणनीति पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

इस तरह, ईरान का रुख न केवल वर्तमान प्रशासन के लिए चुनौती पेश करता है, बल्कि अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों पर भी असर डाल सकता है। यह मामला इस बात की पुष्टि करता है कि मध्यपूर्व में स्थायी शांति और भरोसेमंद वार्ता स्थापित करना कितना जटिल और संवेदनशील है।