ईरान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों में बातचीत, क्षेत्रीय तनाव कम करने पर चर्चा
तेहरान, 3 जून (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात और तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा की।
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और सऊदी अरब में उनके समकक्ष फैसल बिन फरहान अल सऊद के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशों पर चर्चा की गई।
ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने क्षेत्रीय हालात और स्थिरता और तनाव कम करने के लिए चल रही पहलों पर अपने विचार साझा किए।
इससे पहले कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल-थानी ने भी ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की और क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।
मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों के साथ-साथ लेबनान की ताजा स्थिति पर भी बात की।
सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, अल-थानी ने कहा कि कतर इस संकट का समाधान निकालने के लिए एक व्यापक समझौते का समर्थन करता है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे मध्यस्थता की कोशिशों में सकारात्मक तरीके से भाग लें, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता लाई जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता एक बुनियादी सिद्धांत है और इससे किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना या उसे दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करना स्थिति को और गंभीर बना सकता है और क्षेत्र के देशों के महत्वपूर्ण हितों को नुकसान पहुंचा सकता है।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता को आगे बढ़ाने और खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं। होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, क्योंकि यह दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। यह संघर्ष 40 दिनों तक चला और सात अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद रोक दिया गया। हालांकि, बाद में अमेरिका ने इस युद्धविराम का उल्लंघन किया और होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी लगाने के बाद ईरान से जुड़े जहाजों पर हमला किया।
--आईएएनएस
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