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आईओबी बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, चेन्नई और तिरुप्पुर में छह ठिकानों पर छापेमारी

 

चेन्नई, 21 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चेन्नई जोनल ऑफिस-II ने बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में चेन्नई और तिरुप्पुर में छह रिहायशी और व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत पीजीसी कॉर्पोरेशन लिमिटेड और अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रही जांच के तहत की गई।

ईडी ने यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), आर्थिक अपराध शाखा (ईओबी), चेन्नई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर में विभिन्न धाराओं और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

आरोप है कि पीजीसी कॉर्पोरेशन लिमिटेड के निदेशकों डी. प्रेम, आदित्य डी. विक्रम, के. कालीस्वरन और कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों तथा निजी व्यक्तियों ने इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ करीब 116.79 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की।

ईडी के मुताबिक, पीजीसी कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने ईओबी से विभिन्न ऋण सुविधाएं हासिल की थीं। बैंक ने कंपनी के खाते को वर्ष 2013 में एनपीए घोषित किया था, जबकि 2020 में इसे फ्रॉड अकाउंट के तौर पर वर्गीकृत किया गया। जांच में आरोप है कि कंपनी ने अधिक क्रेडिट सुविधा हासिल करने के उद्देश्य से वित्त वर्ष 2011-12 के लिए बैंक को गलत और हेरफेर किए गए वित्तीय विवरण उपलब्ध कराए।

जांच एजेंसी का आरोप है कि ऋण से प्राप्त धन का दुरुपयोग किया गया और उसका एक हिस्सा निजी बैंक खातों तथा विदेशी कंपनियों को ट्रांसफर किया गया। ईडी ने फंड की कथित ‘राउंड ट्रिपिंग’ का भी पता लगाया है।

एजेंसी के अनुसार, डी. प्रेम और आदित्य डी. विक्रम ने भारत और विदेशों में कंपनियों तथा फर्मों का नेटवर्क तैयार किया, जिसके जरिए ऋण की रकम को निवेश के रूप में अलग-अलग संस्थाओं में भेजा गया। साथ ही विदेश भेजी गई ऋण राशि का एक बड़ा हिस्सा बाद में भारत वापस लाया गया और स्थानीय कारोबारी खर्चों में इस्तेमाल किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि बैंक द्वारा ऋण की वसूली शुरू किए जाने के बाद पीजीसी कॉर्पोरेशन लिमिटेड की करीब 235 करोड़ रुपए मूल्य की इन्वेंट्री संबंधित कंपनियों को बेच दी गई। तलाशी के दौरान ईडी को आरोपियों की कथित आलीशान जीवनशैली और उनके जीवनसाथियों तथा रिश्तेदारों के नाम पर मौजूद संपत्तियों और अन्य परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी भी मिली।

एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने अपने जीवनसाथियों और कर्मचारियों के नाम पर नए कारोबार भी शुरू किए थे, लेकिन उनका वास्तविक संचालन और नियंत्रण कथित तौर पर उन्हीं के हाथ में था।

ईडी ने तलाशी के दौरान करीब 82 लाख रुपए की बेहिसाबी नकदी, दो लग्जरी वाहन, लैपटॉप, पेन ड्राइव और मोबाइल फोन सहित डिजिटल उपकरण, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक कागजात बरामद कर जब्त किए। मामले में आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

एसएके/एबीएम