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भारत की नई रणनीतिक पहल, ‘ड्रोन फोर्स’ के गठन की तैयारी, आधुनिक युद्ध क्षमता पर जोर

 

बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और हालिया सैन्य संघर्षों—जैसे ऑपरेशन सिंदूर, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-इजराइल-ईरान तनाव—के बीच भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने एक बड़ा रणनीतिक निर्णय लिया है। रक्षा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए एक विशेष “ड्रोन फोर्स” के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।इंटीग्रेटेड रक्षा मुख्यालय (Integrated Defence Headquarters) के अनुसार यह प्रस्तावित ड्रोन फोर्स भविष्य के किसी भी सैन्य अभियान में “फर्स्ट रेस्पोंडर” यानी सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाली इकाई के रूप में काम करेगी। इसका उद्देश्य युद्ध क्षेत्र में तुरंत निगरानी, डेटा संग्रह और सटीक कार्रवाई क्षमता को मजबूत करना है।

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सूत्रों के मुताबिक, इस नई फोर्स को उन्नत तकनीकों जैसे डेटा वारफेयर और कॉग्निटिव वारफेयर सिस्टम्स का तकनीकी समर्थन भी मिलेगा। इससे युद्ध के दौरान निर्णय लेने की क्षमता और रियल-टाइम इंटेलिजेंस को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत लगभग 50,000 सैन्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण ड्रोन संचालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी, और डिजिटल युद्ध रणनीतियों पर केंद्रित होगा।

इसके अलावा, अगले तीन वर्षों में देशभर में 15 नए “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित किए जाने की योजना है। इन केंद्रों में आधुनिक सिम्युलेटर और वर्चुअल रियलिटी तकनीक का उपयोग कर सैनिकों को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे सैनिक बिना वास्तविक खतरे के जटिल युद्ध परिदृश्यों का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की सैन्य क्षमता को नई तकनीकी दिशा देने वाला साबित हो सकता है। ड्रोन आधारित युद्ध प्रणाली आधुनिक युद्धों में तेजी से अहम भूमिका निभा रही है, जहां निगरानी, हमला और खुफिया जानकारी एक साथ संचालित की जाती है।

हालांकि इस योजना को अभी प्रारंभिक चरण में बताया जा रहा है, लेकिन रक्षा हलकों में इसे भविष्य की युद्ध रणनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में यह फोर्स भारत की रक्षा संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। इस पहल के साथ भारत भी उन देशों की सूची में शामिल हो सकता है, जो युद्ध रणनीति में अत्याधुनिक तकनीक और ड्रोन आधारित सिस्टम्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।