नवी मुंबई में बन रही देश की पहली समुद्री रेल टनल: 7 किलोमीटर लंबी सुरंग से गुजरेगी बुलेट ट्रेन, 35 मंजिला इमारत जितनी गहराई तक होगी खुदाई
भारत के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। महाराष्ट्र में नवी मुंबई के पास ठाणे क्रीक के नीचे देश की पहली समुद्री रेल टनल का निर्माण किया जा रहा है। करीब 7 किलोमीटर लंबी यह सुरंग मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसके पूरा होने के बाद बुलेट ट्रेन समुद्र के नीचे से होकर गुजरेगी। इस परियोजना को इंजीनियरिंग के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
इस टनल की सबसे खास बात इसकी गहराई और निर्माण तकनीक है। सुरंग का सबसे गहरा निर्माण बिंदु पारसिक हिल के नीचे जमीन से करीब 114 मीटर की गहराई पर है। यह ऊंचाई लगभग 35 मंजिला इमारत के बराबर है। हालांकि, यह गहराई जमीन के स्तर से संबंधित है, समुद्र तल से नहीं।
21 किलोमीटर लंबी होगी पूरी अंडरग्राउंड टनल
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत महाराष्ट्र में कुल 21 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग बनाई जा रही है। यह मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) से शिलफाटा तक होगी। इसी सुरंग का लगभग 7 किलोमीटर हिस्सा ठाणे क्रीक के नीचे से गुजरेगा।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के अनुसार, यह देश के किसी भी रेल कॉरिडोर की पहली अंडरसी टनल होगी। पूरी सुरंग में दोनों दिशाओं में चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए ट्रैक की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए एक बड़ी सिंगल ट्यूब सुरंग बनाई जा रही है, जिसका व्यास करीब 13.1 से 13.6 मीटर है।
टनल बनाने में इस्तेमाल हो रही विशाल मशीन
समुद्र के नीचे सुरंग बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया जा रहा है। जुलाई 2026 में दूसरी TBM ने महाराष्ट्र के सावली, घनसोली से विक्रोली की दिशा में खुदाई शुरू की थी। यह मशीन करीब 10 किलोमीटर के हिस्से में काम कर रही है, जिसमें लगभग 7 किलोमीटर हिस्सा ठाणे क्रीक के नीचे से गुजरेगा।इस मशीन का वजन करीब 3,200 टन है और इसकी लंबाई लगभग 96 मीटर बताई गई है। मशीन का कटर हेड करीब 13.6 मीटर व्यास का है। इसके जरिए जमीन और चट्टानों की खुदाई के साथ-साथ सुरंग की दीवारों को मजबूत करने के लिए कंक्रीट के सेगमेंट लगाए जाते हैं।
पानी के दबाव और मिट्टी की बनावट बड़ी चुनौती
समुद्र के नीचे सुरंग बनाने में इंजीनियरों के सामने कई चुनौतियां हैं। इनमें पानी का दबाव, मिट्टी की कमजोर परतें, चट्टानों की बनावट और आसपास की इमारतों पर निर्माण के असर को नियंत्रित करना शामिल है।इसके लिए आधुनिक मिक्सशील्ड TBM तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। मशीन के भीतर दबाव बनाए रखकर खुदाई की जाती है, ताकि आसपास की जमीन अस्थिर न हो। साथ ही कंक्रीट के रिंग सेगमेंट और वाटरप्रूफ सीलिंग के जरिए सुरंग को मजबूत बनाया जाता है।निर्माण के दौरान जमीन में होने वाले बदलाव और आसपास की संरचनाओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सेंसर भी लगाए गए हैं।
दुनिया की चुनिंदा समुद्री सुरंग परियोजनाओं में शामिल
इस परियोजना को दुनिया की चुनिंदा अंडरसी टनल परियोजनाओं में से एक बताया जा रहा है। हालांकि, इसे दुनिया की छठी समुद्री सुरंग कहना किस श्रेणी की सुरंगों की गणना पर आधारित है, यह स्पष्ट नहीं है। भारत के लिए इसकी खासियत यह है कि पहली बार किसी रेल कॉरिडोर के लिए समुद्र के नीचे इतनी लंबी सुरंग बनाई जा रही है।मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 508 किलोमीटर है। इस परियोजना में बुलेट ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। समुद्री सुरंग का निर्माण पूरा होना इस हाई स्पीड रेल परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।