भारत का पहला AI सैटेलाइट अंतरिक्ष में, वीडियो में जाने तस्वीरें खींचने के साथ वहीं करेगा डेटा का विश्लेषण
भारत ने स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद की स्पेसटेक कंपनी TakeMe2Space का MOI-1A सैटेलाइट अंतरिक्ष में पहुंच गया है। कंपनी के मुताबिक यह भारत का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट है। इसकी खासियत यह है कि यह सिर्फ पृथ्वी की तस्वीरें और डेटा जुटाकर उन्हें धरती पर नहीं भेजेगा, बल्कि अंतरिक्ष में ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से उनका विश्लेषण भी कर सकेगा।
अंतरिक्ष में ही होगा डेटा का एनालिसिस
आमतौर पर पृथ्वी की निगरानी करने वाले सैटेलाइट बड़ी मात्रा में तस्वीरें और अन्य डेटा जुटाते हैं। इसके बाद यह पूरा डेटा ग्राउंड स्टेशन तक भेजा जाता है, जहां कंप्यूटर उसकी जांच और विश्लेषण करते हैं। इस प्रक्रिया में काफी समय और कम्युनिकेशन बैंडविड्थ की जरूरत पड़ती है।MOI-1A इस प्रक्रिया में बदलाव करने की कोशिश करता है। सैटेलाइट में मौजूद कंप्यूटिंग सिस्टम अंतरिक्ष में ही तस्वीरों और डेटा को प्रोसेस कर सकता है। इसके बाद सिर्फ जरूरी या उपयोगी जानकारी को धरती पर भेजा जा सकता है। इससे बड़े पैमाने पर कच्चा डेटा ट्रांसफर करने की जरूरत कम हो सकती है।
बॉर्डर निगरानी से आपदा प्रबंधन तक उपयोग
ऑर्बिटल कंप्यूटिंग तकनीक का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। पृथ्वी की तस्वीरों का अंतरिक्ष में ही विश्लेषण होने से सीमा निगरानी, बाढ़, जंगलों में बदलाव, कृषि क्षेत्र, खनन और अन्य इलाकों की निगरानी में मदद मिल सकती है।उदाहरण के तौर पर अगर सैटेलाइट किसी बड़े इलाके की सैकड़ों तस्वीरें लेता है, तो AI मॉडल उनमें से सिर्फ उस हिस्से की जानकारी पहचान सकता है जिसकी जरूरत है। इसके बाद पूरी तस्वीरें धरती पर भेजने के बजाय विश्लेषण से मिली जरूरी जानकारी भेजी जा सकती है। इससे डेटा ट्रांसमिशन का समय और लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
Nvidia के प्रोसेसर से लैस है सैटेलाइट
MOI-1A में Nvidia Orin NX edge-computing प्रोसेसर लगाए गए हैं। ये प्रोसेसर सैटेलाइट को अंतरिक्ष में AI मॉडल चलाने और डेटा का विश्लेषण करने की क्षमता देते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक सैटेलाइट का वजन 50 किलोग्राम से कम है, जबकि कुछ रिपोर्टों में इसका वजन करीब 14 किलोग्राम बताया गया है।कंपनी के मुताबिक इस मिशन के लिए कृषि, माइनिंग, सप्लाई चेन और इंश्योरेंस जैसे क्षेत्रों से जुड़े ग्राहक भी जुड़े हैं। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि भविष्य में सैटेलाइट सिर्फ डेटा कलेक्ट करने वाले उपकरण नहीं होंगे, बल्कि अंतरिक्ष में ही कंप्यूटिंग और AI प्रोसेसिंग भी कर सकेंगे।
भारत के स्पेस सेक्टर के लिए नई दिशा
MOI-1A का मिशन भारत में निजी स्पेस कंपनियों की बढ़ती भूमिका को भी दिखाता है। TakeMe2Space इसे भारत के पहले ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट के रूप में पेश कर रही है। कंपनी की योजना आगे चलकर बड़े और आपस में जुड़े सैटेलाइट सिस्टम विकसित करने की भी है।इस तकनीक के सफल संचालन से अंतरिक्ष में ही डेटा प्रोसेसिंग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। भविष्य में ऐसे सैटेलाइट पृथ्वी की निगरानी, आपदा प्रबंधन और बड़े डेटा के विश्लेषण में समय और संसाधनों की बचत करने वाली तकनीक के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।