भारत की रक्षा क्षमता को मिलेगा नया बूस्ट, फुटेज में देंखे विकसित हुई स्वदेशी ‘वाहक-6’ मल्टी ड्रोन मदरशिप प्रणाली
भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। स्वदेशी ‘वाहक-6’ मल्टी ड्रोन मदरशिप प्रणाली विकसित की गई है। निजी कंपनी एंड्योरएयर ने सरकारी रक्षा कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के सहयोग से इस सिस्टम को तैयार किया है। यह प्रणाली निगरानी से लेकर लक्ष्य की पहचान और उस पर कार्रवाई तक सैन्य अभियानों में मदद करने के लिए डिजाइन की गई है।
‘वाहक-6’ सिस्टम की खासियत यह है कि इसके जरिए हवा में एक साथ कई माइक्रो-ड्रोन तैनात किए जा सकते हैं। सिस्टम में शामिल ड्रोन दुश्मन के ठिकानों की निगरानी, लक्ष्य की पहचान और जरूरत पड़ने पर उन पर हमला करने में सक्षम हैं। इसकी एक प्रमुख क्षमता GPS के बिना ऑपरेशन करने की भी बताई गई है।
सर्च से डिस्ट्रॉय तक मदद करेगा सिस्टम
वाहक-6 को इस तरह विकसित किया गया है कि यह सैन्य अभियानों में सर्च, डिटेक्ट और डिस्ट्रॉय की पूरी प्रक्रिया में मदद कर सके। इस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला ‘अलख’ माइक्रो-यूएवी लक्ष्य की खोज और निगरानी में अहम भूमिका निभाता है।अलख-एस ड्रोन किसी संभावित लक्ष्य की पहचान करने और उसकी निगरानी करने का काम करता है। इसके बाद मदरशिप और छोटे ड्रोन के बीच तेजी से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है। अलख-एस से लक्ष्य की जानकारी मिलने के बाद हमलावर ड्रोन उस स्थान पर कार्रवाई कर सकते हैं।
अलख ड्रोन के दो वेरिएंट
इस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले अलख माइक्रो-यूएवी के दो वेरिएंट बताए गए हैं। इनमें अलख-एस को निगरानी और लक्ष्य की पहचान के लिए तैयार किया गया है, जबकि अलख-के लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम है।इस तरह दोनों ड्रोन अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते हैं। पहले निगरानी और पहचान के जरिए लक्ष्य की जानकारी जुटाई जाती है और इसके बाद हमले के लिए सक्षम ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सबल-20 हेलीकॉप्टर पर फिट है सिस्टम
वाहक-6 प्रणाली को हेलीकॉप्टर जैसे सबल-20 मदरशिप पर फिट किया गया है। यह मदरशिप हवा में रहकर माइक्रो-ड्रोन को तैनात करने और उनके साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान करने में सक्षम प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करता है।इस सिस्टम की सबसे अहम विशेषताओं में एक साथ कई ड्रोन को हवा में तैनात करने की क्षमता है। इससे किसी क्षेत्र की निगरानी का दायरा बढ़ाया जा सकता है और अलग-अलग लक्ष्यों से जुड़ी जानकारी तेजी से हासिल की जा सकती है।
स्वदेशी वाहक-6 प्रणाली को भारत की ड्रोन और मानव रहित युद्ध प्रणालियों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है। निजी क्षेत्र और सरकारी रक्षा कंपनी के सहयोग से तैयार यह तकनीक भविष्य में भारतीय सशस्त्र बलों के लिए निगरानी और लक्ष्य आधारित अभियानों में उपयोगी साबित हो सकती है।