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भारतीय रेल का 'मिशन 4-ट्रैक': देश के 7 सबसे बिजी रूट होंगे फोर-लेन, जानिए क्या है मोदी कैबिनेट का प्लान

 

भारतीय रेलवे देश के सबसे व्यस्त रेल रूट्स पर ट्रेनों की बढ़ती संख्या और लगातार बढ़ते यात्री व माल ढुलाई के दबाव को कम करने की तैयारी में है। रेलवे करीब 11 हजार किलोमीटर लंबे सात हाई-डेंसिटी रेल रूट्स को चार ट्रैक वाला बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इन रूट्स पर देश के कुल रेलवे ट्रैफिक का करीब 41 फीसदी हिस्सा चलता है।

रेलवे के इस 'मिशन 4-ट्रैक' का मकसद मौजूदा रूट्स की क्षमता बढ़ाना, ट्रेनों की आवाजाही को सुगम बनाना और व्यस्त कॉरिडोर पर होने वाली देरी को कम करना है। खासतौर पर दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे बेहद व्यस्त रूट्स को इस योजना से बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

किन रूट्स पर बढ़ेगी क्षमता?

चार ट्रैक किए जाने वाले हाई-डेंसिटी नेटवर्क में देश के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले कई महत्वपूर्ण कॉरिडोर शामिल हैं। इनमें दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-मुंबई, हावड़ा-चेन्नई, दिल्ली-चेन्नई और चेन्नई-मुंबई जैसे प्रमुख रूट शामिल हैं। दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर पर यात्री और मालगाड़ियों की भारी आवाजाही होती है।

दिल्ली-हावड़ा रूट पर रोजाना 120 से ज्यादा यात्री ट्रेनें और करीब 100 मालगाड़ियां चलती हैं। वहीं दिल्ली-मुंबई रूट पर 90 से अधिक यात्री ट्रेनें और करीब 80-85 मालगाड़ियां प्रतिदिन संचालित होती हैं। ऐसे में अतिरिक्त ट्रैक बनने से इन रूट्स पर ट्रेनों के संचालन के लिए ज्यादा क्षमता उपलब्ध होगी।

यात्रियों को क्या फायदा होगा?

चार ट्रैक होने के बाद एक ही रूट पर यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को ज्यादा बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा। इससे ट्रेनों को दूसरे ट्रेन के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही, व्यस्त रूट्स पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और संचालन को अधिक व्यवस्थित करने में भी मदद मिलेगी।

रेलवे का लक्ष्य सिर्फ यात्री ट्रेनों की क्षमता बढ़ाना नहीं है, बल्कि माल ढुलाई को भी तेज और बेहतर बनाना है। इससे देश के प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी केंद्रों के बीच माल पहुंचाने में समय कम करने में मदद मिल सकती है।

रेलवे लगातार बढ़ा रहा है ट्रैक क्षमता

यह योजना रेलवे के व्यापक मल्टी-ट्रैकिंग अभियान का हिस्सा है। अगस्त 2026 में केंद्रीय कैबिनेट ने चार मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। करीब 9,450 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में लगभग 410 किलोमीटर अतिरिक्त ट्रैक क्षमता बढ़ेगी।

इससे पहले अप्रैल 2026 में भी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में करीब 601 किलोमीटर के दो मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी, जिनकी अनुमानित लागत 24,815 करोड़ रुपये है।

यानी आने वाले वर्षों में भारतीय रेलवे का फोकस सिर्फ नई ट्रेनें चलाने पर नहीं, बल्कि मौजूदा व्यस्त रूट्स की क्षमता बढ़ाने पर भी है। अगर चार ट्रैक वाली यह योजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर पर ट्रेनों की आवाजाही और माल ढुलाई दोनों को बड़ा फायदा मिल सकता है।