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लद्दाख में भारतीय सेना की नई रणनीति: ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में बैक्ट्रियन ऊँटों की तैनाती

 

ठंडे रेगिस्तानी और अत्यंत दुर्गम इलाकों में सैन्य अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भारतीय सेना ने एक अहम कदम उठाया है। हाल ही में सेना ने लद्दाख क्षेत्र में बैक्ट्रियन ऊँटों को तैनात किया है। यह कदम न केवल पारंपरिक संसाधनों और आधुनिक सैन्य तकनीक के संतुलित उपयोग को दर्शाता है, बल्कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भारत की रणनीतिक तैयारियों को भी मजबूत करता है।

बैक्ट्रियन ऊँटों की खासियत यह है कि वे अत्यधिक ठंड, पतली हवा और 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी सहज रूप से काम कर सकते हैं। लद्दाख जैसे इलाके, जहां तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है और ऑक्सीजन का स्तर कम रहता है, वहां सामान्य वाहनों और यहां तक कि कुछ आधुनिक उपकरणों की भी सीमाएं सामने आ जाती हैं। ऐसे में बैक्ट्रियन ऊँट सेना के लिए एक भरोसेमंद विकल्प साबित हो रहे हैं।

इन ऊँटों की सबसे बड़ी ताकत उनकी सहनशक्ति है। बैक्ट्रियन ऊँट कम पानी और सीमित चारे में भी लंबी दूरी तय करने में सक्षम होते हैं। इसके अलावा, ये ऊँट करीब 250 किलोग्राम तक वजन ढो सकते हैं, जिससे दुर्गम और बर्फीले इलाकों में रसद पहुंचाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। हथियार, गोला-बारूद, राशन और अन्य जरूरी सामान इन ऊँटों के माध्यम से उन चौकियों तक पहुंचाया जा सकता है, जहां तक सड़क या वाहन पहुंचना बेहद मुश्किल होता है।

सैन्य सूत्रों के अनुसार, लद्दाख के कई अग्रिम इलाकों में मौसम और भू-आकृति के कारण हेलीकॉप्टर या भारी वाहनों का उपयोग हर समय संभव नहीं होता। ऐसे में बैक्ट्रियन ऊँट पारंपरिक लेकिन अत्यंत प्रभावी साधन के रूप में उभरकर सामने आए हैं। ये ऊँट न केवल कम लागत में काम करते हैं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी भरोसेमंद बने रहते हैं।

भारतीय सेना पहले भी पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और पशुओं का रणनीतिक उपयोग करती रही है। बैक्ट्रियन ऊँटों की तैनाती इसी नीति का विस्तार मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सेना की लॉजिस्टिक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल समाधान भी प्रदान करता है, क्योंकि इससे ईंधन पर निर्भरता कुछ हद तक कम होती है।

स्थानीय लोगों के लिए भी यह पहल रोजगार और संरक्षण के नए अवसर लेकर आई है। इन ऊँटों की देखरेख और प्रशिक्षण में स्थानीय अनुभव का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सेना और स्थानीय समुदाय के बीच सहयोग और मजबूत हो रहा है।

कुल मिलाकर, लद्दाख में बैक्ट्रियन ऊँटों की तैनाती भारतीय सेना की दूरदर्शी रणनीति का प्रतीक है। यह दिखाता है कि आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक और प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग कर भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बना रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में यह कदम भविष्य के सैन्य अभियानों के लिए एक प्रभावी मॉडल साबित हो सकता है