इंडिया गठबंधन की रैली पर घमासान, एआईएमआईएम बोली- हम गठबंधन का हिस्सा नहीं; भाजपा ने विपक्ष को घेरा
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रैली में विपक्षी दलों की भागीदारी, चुनाव आयोग और एसआईआर के मुद्दे के साथ-साथ कारोबारियों की चिंताओं को लेकर अलग-अलग नेताओं ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। एआईएमआईएम ने स्पष्ट किया है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है और उसे रैली के लिए आमंत्रित भी नहीं किया गया है। वहीं, भाजपा और जदयू के नेताओं ने रैली को सत्ता हासिल करने के लिए विपक्ष की बेचैनी करार दिया है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने रैली को बड़ा बताते हुए कहा कि इसमें देशभर से लोग शामिल होंगे।
मुंबई में एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि उनकी पार्टी इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है और उन्हें रैली के लिए निमंत्रण भी नहीं मिला है। इंडिया गठबंधन के नेता अपने राजनीतिक मंच के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि एआईएमआईएम की अपनी अलग राजनीतिक स्थिति है। हालांकि, पठान ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी शुरुआत से ही एसआईआर का विरोध करती रही है। सबसे पहले उनकी पार्टी ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति उठाई थी। बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी एसआईआर के खिलाफ याचिका दाखिल की है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर लगातार कानूनी और राजनीतिक स्तर पर अपनी आपत्ति दर्ज करा रही है।
पटना में जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर विपक्षी नेताओं पर तंज कसा। उन्होंने विपक्षी दलों की तुलना मंच पर अभिनय करने वाले कलाकारों से करते हुए कहा कि ये लोग अलग-अलग तरह के प्रदर्शन करके जनता को आकर्षित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन जनता इनके झांसे में नहीं आएगी। उन्होंने रैली में शामिल दलों को फ्लॉप फिल्म के फ्लॉप कलाकार बताते हुए कहा कि जनता उन्हें स्वीकार नहीं करेगी।
मंत्री रामकृपाल यादव ने भी कांग्रेस की रैली को लेकर कहा कि इससे पार्टी को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि जनता पहले ही अपने वोट के जरिए कांग्रेस को नकार चुकी है। रामकृपाल यादव ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता हासिल करने की बेचैनी में वे परेशान और व्याकुल हैं।
दिल्ली में भाजपा सांसद रवि किशन ने कांग्रेस पर व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और गरीबों की परेशानियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उन लोगों से पूछना चाहिए, जिनके जीवन को उसकी नीतियों ने प्रभावित किया है। 2014 के बाद देश भ्रष्टाचार और बड़े घोटालों से बाहर निकला है और अपने पैरों पर खड़ा हुआ है। इसका श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस देश में अव्यवस्था क्यों पैदा करना चाहती है और विकास की प्रक्रिया को पीछे क्यों ले जाना चाहती है।
रवि किशन ने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद को चलने नहीं दे रहा और देश की प्रगति में बाधा डाल रहा है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या वह देश में फिर आतंकवादी हमले, बम धमाके और दंगे चाहती है तथा अनुच्छेद 370 की वापसी की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि वह वास्तव में क्या चाहती है।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने रैली को लेकर कहा कि एक नवंबर का आयोजन बहुत बड़ा होगा। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के विरोध में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनके बयान से स्पष्ट है कि इंडिया गठबंधन इस रैली के जरिए चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहता है।
बिहार सरकार में मंत्री लखेंद्र पासवान ने इसके विपरीत विपक्षी गठबंधन पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की जनता इंडिया गठबंधन, बिहार में विपक्ष के नेता, कांग्रेस और पूरे विपक्ष को नकार चुकी है। विपक्ष के पास अब कोई राजनीतिक काम नहीं बचा है और उसके नेता बेरोजगार राजनेताओं का समूह बन गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद विपक्ष को हर जगह वोट चोरी दिखाई देने लगती है, जबकि जीतने पर उसे चुनाव में कोई गड़बड़ी नजर नहीं आती।
रैली को लेकर कारोबारियों की चिंता भी सामने आई है। एनडीटीए के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने कहा कि पिछले दो महीनों में व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ है। दीपावली के मौसम में कारोबार बढ़ने की उम्मीद थी और व्यापारियों ने त्योहार को देखते हुए पहले से सामान का स्टॉक कर लिया था। अक्टूबर से फरवरी तक का समय आमतौर पर कारोबार के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन इस बार बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी। अब एक नवंबर को रामलीला मैदान में रैली प्रस्तावित है। व्यापारियों ने पहले ही मांग की थी कि दीपावली के बाद रैली आयोजित की जाए, ताकि बाजारों में खरीदारी प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि दीपावली हिंदुओं का महत्वपूर्ण त्योहार है और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इस दौरान लोग बाजारों में खरीदारी करने पहुंचते हैं, जिससे कारोबारियों को अच्छे व्यापार की उम्मीद रहती है। ऐसे समय में रैली होने से बाजार और व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है।
दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने भी रैली को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल अच्छा है और वह इस विषय पर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते। हालांकि, उन्होंने नगर निगम की ओर से बिना कोई पैसा खर्च किए खेल आयोजनों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान कांग्रेस के नेताओं के नाम बड़े खेल घोटाले में सामने आए थे। इसके अलावा उन्होंने तंदूर मामले और 1984 के दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता।
--आईएएनएस
पीएसके/डीकेपी