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इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने सरकार से मांगा जवाब, कहा-छात्रों पर गोली चलाने जैसी नौबत क्यों आई? चर्चा से ही निकलेगा समाधान

 

नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान मंगलवार को छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई, पैलेट गन के इस्तेमाल और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने सिर पर ‘न्याय’ लिखी पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने छात्रों पर बल प्रयोग की कड़ी आलोचना करते हुए संसद में विस्तृत चर्चा की मांग उठाई।

पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि लोगों को लाठियों से पीटा जा रहा है और यह तरीका लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार पहले कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई की चर्चा होती थी, उसी तरह की स्थिति अब यहां दिखाई दे रही है।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सम्मान के प्रतीक मानी जाने वाली पगड़ी किसी ऐसे व्यक्ति को पहनाना उचित नहीं है, जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हों।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 20 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि उसमें एक सुरक्षाकर्मी छात्रों के पीछे एके-47 लेकर दौड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

तिवारी ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और अहिंसात्मक प्रदर्शन का अधिकार देता है। यदि सरकार ऐसे प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाने का प्रयास करती है तो संसद का दायित्व बनता है कि इस विषय पर चर्चा कर इसकी निंदा करे।

इसी बीच, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर होने वाली चर्चा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विपक्ष सरकार से कई अहम सवाल पूछेगा। उन्होंने कहा कि केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने या कुछ कानूनी प्रावधानों में बदलाव कर देने से छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं हो जाएगा। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि उसका प्रस्तावित कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कितना प्रभावी होगा।

लोकसभा में 'एंटी-पेपर लीक बिल' पर चर्चा के बारे में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, "मुझे अभी पक्का नहीं पता। हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। अगर बहस में उन मुद्दों पर बात होती है जिनके बारे में देश जानना चाहता है, तो हम ये सभी सवाल उठाएंगे। हम जानना चाहते हैं कि असल में क्या हुआ है। क्या सरकार का लाया गया बिल काफी है? क्या सिर्फ़ फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने या एक-दो छोटे-मोटे बदलाव करने से सच में हमारे बच्चों का भविष्य बेहतर होगा? ये ऐसे सवाल हैं जिन्हें पूछना जरूरी है।"

उन्होंने कहा कि ऐसे कई और मुद्दे हैं जिन पर सरकार को जवाब देना चाहिए। सरकार की जवाबदेही बहुत ज़रूरी है। जब भी ऐसी घटनाएँ होती हैं, तो किसी मंत्री का इस्तीफ़ा मांगना सही हो सकता है, लेकिन सिर्फ़ इतना ही काफ़ी नहीं है। पूरे सिस्टम की जाँच और उसमें सुधार की ज़रूरत है।

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने भी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छात्रों से किए गए वादों से सरकार पीछे हटती है तो छात्र और विपक्ष दोनों आंदोलन के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं, बल्कि देश के युवाओं और उनके भविष्य का है। यदि सरकार ने अपेक्षित कदम नहीं उठाए तो देशभर में और बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।

वहीं, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि इस पूरे मामले पर संसद में व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संवाद से ही समाधान निकल सकता है और सरकार को यह बताना होगा कि छात्रों पर गोली चलाने जैसी स्थिति क्यों बनी तथा उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया। उन्होंने बेरोजगारी को भी गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि बेरोजगार युवाओं पर दंडात्मक कार्रवाई उचित नहीं है।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम