AI साइबर हमलों का बढ़ता खतरा: बैंक खाते और UPI यूजर्स निशाने पर, CERT-In रिपोर्ट ने दी चेतावनी
भारत में डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। अब साइबर अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पहले से ज्यादा खतरनाक और जटिल हमले करने लगे हैं। CERT-In (भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल) की नई डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में साइबर हमलों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और यह खतरा आम बैंक खाताधारकों से लेकर UPI यूजर्स तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि साइबर हमलावर अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे फर्जी मैसेज, नकली कॉल, पहचान की चोरी और ऑनलाइन ठगी के मामले बढ़ने की आशंका है।
AI की मदद से हो रहे हैं नए तरह के साइबर अटैक
पहले साइबर अपराधी सामान्य फिशिंग मैसेज या नकली वेबसाइट के जरिए लोगों को ठगते थे, लेकिन अब AI ने उनके तरीकों को और ज्यादा प्रभावी बना दिया है। अपराधी AI की मदद से किसी व्यक्ति की भाषा, आवाज और व्यवहार की नकल कर फर्जी कॉल या संदेश भेज सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अब ठग बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या किसी परिचित व्यक्ति की आवाज जैसी आवाज बनाकर लोगों से OTP, UPI PIN या बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
UPI यूजर्स पर बढ़ा खतरा
भारत में डिजिटल भुगतान के लिए UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसी वजह से साइबर अपराधियों की नजर UPI यूजर्स पर भी है। फर्जी पेमेंट रिक्वेस्ट, नकली कस्टमर केयर नंबर, रिमोट एक्सेस ऐप और फर्जी लिंक के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए पेमेंट रिक्वेस्ट को स्वीकार करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। UPI के जरिए पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी PIN डालने की जरूरत नहीं होती।
बैंक खाते को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये तरीके
साइबर हमलों से बचने के लिए यूजर्स को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए:
- किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- बैंक, UPI या ATM से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
- OTP, UPI PIN और पासवर्ड हमेशा गोपनीय रखें।
- मोबाइल में मजबूत पासवर्ड और स्क्रीन लॉक का इस्तेमाल करें।
- बैंकिंग ऐप और मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम को समय-समय पर अपडेट करते रहें।
- संदिग्ध कॉल या मैसेज आने पर तुरंत संबंधित बैंक से संपर्क करें।
डीपफेक और पहचान की चोरी भी बड़ी चुनौती
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक तकनीक भी साइबर अपराधियों का नया हथियार बन रही है। इसमें किसी व्यक्ति की आवाज या वीडियो को बदलकर गलत जानकारी फैलाने या धोखाधड़ी करने की कोशिश की जा सकती है।
CERT-In लगातार लोगों को डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूक कर रहा है और साइबर घटनाओं की निगरानी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
ऑनलाइन बैंकिंग और UPI ने लोगों की जिंदगी आसान बना दी है, लेकिन इसके साथ डिजिटल सावधानी भी जरूरी है। साइबर अपराधी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए यूजर्स को भी जागरूक रहकर अपनी निजी और वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखनी होगी। थोड़ी सी सतर्कता बैंक खाते और डिजिटल लेनदेन को बड़े नुकसान से बचा सकती है।