सट्टा-मटका केस में फिर पुलिस के रडार पर जीतू पटवारी के भाई नाना, मोबाइल से मिले सुरागों की जांच
मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी एक बार फिर इंदौर पुलिस के रडार पर आ गए हैं। सट्टा-मटका मामले की जांच में पुलिस उनके मोबाइल फोन से मिले कथित सुरागों को खंगाल रही है। इसी आधार पर पुलिस नाना पटवारी को दोबारा हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है। मामले में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मोबाइल से सामने आए संपर्क और जानकारी का सट्टा-मटका नेटवर्क से किस तरह संबंध है।
नाना पटवारी का नाम इससे पहले भी सट्टा-मटका मामले की जांच के दौरान सामने आया था। पुलिस की कार्रवाई और पूछताछ के बाद अब जांच एक बार फिर उनके इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। हालांकि, मोबाइल से मिले डेटा की प्रकृति और उसमें सामने आए लोगों की भूमिका को लेकर पुलिस की विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
मोबाइल से मिले सुरागों पर फोकस
पुलिस जांच का मुख्य आधार नाना पटवारी के मोबाइल फोन से मिली जानकारी बताई जा रही है। जांच एजेंसियां मोबाइल में मौजूद कॉल डिटेल, संपर्कों, संदेशों और अन्य डिजिटल जानकारी को खंगाल सकती हैं। इसका उद्देश्य सट्टा-मटका कारोबार से जुड़े लोगों और कथित नेटवर्क के बीच संबंधों का पता लगाना है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मोबाइल से मिले सुराग किसी संगठित सट्टा नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं या नहीं। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो नाना पटवारी से दोबारा पूछताछ की जा सकती है।
दोबारा हिरासत में लिए जाने की संभावना
जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों के आधार पर पुलिस नाना पटवारी को दोबारा हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है। पुलिस का उद्देश्य कथित सट्टा नेटवर्क से जुड़े संपर्कों और लेनदेन की कड़ियों को समझना है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने उन्हें औपचारिक रूप से दोबारा हिरासत में लिया है या नहीं। पुलिस की अगली कार्रवाई मोबाइल से मिले डेटा और जांच में सामने आने वाले अन्य सबूतों के आधार पर तय होगी।
राजनीतिक रूप से भी अहम मामला
नाना पटवारी के मामले में राजनीतिक पहलू भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि वह मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई हैं। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई और जांच पर राजनीतिक नजर भी बनी हुई है।
फिलहाल पुलिस कथित सट्टा-मटका नेटवर्क की पूरी कड़ी तलाशने में जुटी है। मोबाइल से मिले सुराग जांच में कितने महत्वपूर्ण साबित होते हैं और नाना पटवारी की भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं, यह पुलिस की आगे की पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।