‘वैश्विक सोच और सामूहिक प्रयास ही समाधान’, इन-स्टेप कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति का संदेश
नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को तेजी से बदलती वैश्विक सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर अंतरराष्ट्रीय बातचीत, आपसी सीख और रणनीतिक सहयोग की अपील की।
उपराष्ट्रपति भवन में 'इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम' (इन-स्टेप) के चौथे संस्करण के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने 38 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और भारत के प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने विशेष रूप से मित्रवत और समान विचारधारा वाले देशों (जिनमें 'ग्लोबल साउथ' के देश भी शामिल हैं) के वरिष्ठ पेशेवरों और नेताओं की भागीदारी पर प्रकाश डाला।
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि इन-स्टेप उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसे भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान सार्थक बातचीत, आपसी सीख और रणनीतिक जुड़ाव के लिए एक स्थायी मंच बनाने के लिए व्यक्त किया गया था। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया की परस्पर जुड़ी प्रकृति के कारण देशों के लिए अकेले दम पर उभरती चुनौतियों का सामना करना और भी मुश्किल हो गया है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि रणनीतिक माहौल तेजी से बदल रहा है, जिसमें पारंपरिक सुरक्षा चिंताएं अब तकनीक, साइबरस्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ी चुनौतियों के साथ जुड़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि इन-स्टेप एक व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने, वैश्विक घटनाक्रमों के दीर्घकालिक प्रभावों का अनुमान लगाने और उचित प्रतिक्रिया तैयार करने का अवसर प्रदान करता है।
सीपी राधाकृष्णन ने कहा, "वैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें और एकजुट होकर काम करें।"
उन्होंने इन तीन सिद्धांतों को रेखांकित किया जो इस पहल की मूल सोच को दर्शाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि साझा चुनौतियों का समाधान अक्सर सहयोग, समन्वय और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय बातचीत को आकार देने में विकासशील देशों के महत्व पर जोर दिया और कहा कि इसके विविध अनुभव और विकास संबंधी प्राथमिकताएं मजबूती, विकास, सुरक्षा, शासन और सहयोग के मामले में बहुमूल्य सीख प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि 'ग्लोबल साउथ' के देशों के साथ भारत का जुड़ाव आपसी सम्मान, साझा हितों, संप्रभु समानता और हर देश की विकास और रणनीतिक प्राथमिकताओं को समझने पर आधारित है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भ्रष्टाचार विकासशील देशों के सामने एक बड़ी चुनौती बना हुआ है और इसे खत्म करने के लिए मिलकर कोशिश करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिभागियों से हर स्तर पर भ्रष्टाचार-मुक्त सिस्टम बनाने की दिशा में काम करने का आग्रह किया और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और पारदर्शिता के महत्व पर जोर दिया।
कोविड-19 महामारी के दौरान 'वैक्सीन मैत्री' पहल के ज़रिए विकासशील देशों को भारत की उदार मदद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीकी तरक्की और वैज्ञानिक खोजों का फायदा पूरी मानवता को मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी जानकारी और इनोवेशन को मानवता की भलाई के लिए साझा किया जाना चाहिए, जो भारत की 'वसुधैव कुटुंबकम' (एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य) की भावना को दर्शाता हो।
उन्होंने प्रतिभागियों के इस खास समूह को एक साथ लाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की तारीफ की और भरोसा जताया कि उनकी बातचीत से भाग लेने वाले देशों के बीच मजबूत पेशेवर रिश्ते बनेंगे और रणनीतिक समझ बेहतर होगी।
इन-स्टेप के चौथे संस्करण में 38 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जिनमें 22 देशों के 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी हैं। इन देशों में श्रीलंका, सेशेल्स, मंगोलिया, पाल, मॉरिशस, मालदीव, ओमान, गुयाना, चिली, अर्जेंटीना, फिलीपींस, थाईलैंड, आर्मेनिया, किर्गिस्तान, कतर, म्यांमार, उज्बेकिस्तान और ब्राजील शामिल हैं।
इन-स्टेप दो हफ्ते का एक प्रोग्राम है जिसे विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय ने मिलकर नेशनल डिफेंस कॉलेज के सहयोग से आयोजित किया है। यह वरिष्ठ पेशेवरों को रणनीतिक, सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा करने और संस्थागत व पेशेवर संबंध मजबूत करने का मंच देता है। इसके पिछले संस्करण मार्च 2024, अक्टूबर 2024 और अक्टूबर-नवंबर 2025 में आयोजित किए गए थे।
--आईएएनएस
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