90 दिनों में मिडिल क्लास का मासिक खर्च 3 हजार रुपए बढ़ा, वीडियो में जाने रसोई का बजट सबसे ज्यादा प्रभावित
महंगाई ने एक बार फिर मध्यम वर्गीय परिवारों की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है। फरवरी-मार्च में जो परिवार अपने जरूरी मासिक खर्च करीब 9,258 रुपए में पूरा कर लेता था, उसे अब मई के अंत तक उसी जीवनशैली को बनाए रखने के लिए लगभग 12,318 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। यानी महज 90 दिनों में घरेलू बजट पर करीब 3,060 रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है, जो लगभग 33 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
रसोई का बजट सबसे ज्यादा बिगड़ा
महंगाई का सबसे अधिक असर रसोई के खर्च पर देखने को मिल रहा है। सब्जियों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण परिवारों का मासिक खर्च काफी बढ़ गया है। कुछ महीने पहले जहां एक परिवार लगभग 2,500 रुपए में महीनेभर की सब्जियां खरीद लेता था, वहीं अब उसी मात्रा की सब्जियों के लिए 3,500 से 3,800 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। टमाटर, प्याज, हरी सब्जियों और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बढ़ी कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
दाल, तेल और मसाले भी हुए महंगे
रसोई में इस्तेमाल होने वाली अन्य जरूरी वस्तु भी महंगाई की मार से अछूती नहीं हैं। दाल, खाद्य तेल और मसालों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इन वस्तुओं की कीमतों में आई बढ़ोतरी का सीधा असर मासिक घरेलू बजट पर पड़ रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण परिवारों को अपनी बचत और अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है।
दूध और गैस सिलेंडर ने बढ़ाया बोझ
दूध की कीमतों में भी करीब 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में रोजाना दो लीटर दूध खरीदने वाले परिवार को महीने में लगभग 120 रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं।वहीं घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में भी करीब 60 रुपए तक का इजाफा हुआ है। इससे रसोई का कुल खर्च और बढ़ गया है।
मिडिल क्लास की बढ़ी चिंता
लगातार बढ़ती महंगाई के बीच मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए घरेलू बजट संभालना चुनौती बनता जा रहा है। आय में अपेक्षित बढ़ोतरी न होने और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ने से परिवारों की आर्थिक योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि खाद्य वस्तुओं और आवश्यक सेवाओं की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले महीनों में मिडिल क्लास पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में आम लोगों की नजर सरकार और बाजार की उन नीतियों पर टिकी है, जो महंगाई को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं।