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आईआईटी में बनी रोबोटिक्स लेबोरेटरी, निर्माण पर होगी अत्याधुनिक रिसर्च

 

नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। निर्माण क्षेत्र में कई जगह इंसानों का काम रोबोट ने आसान किया है। इसी प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए आईआईटी जैसे संस्थान में अत्याधुनिक रोबोटिक्स प्रयोगशाला शुरू की गई है। आईआईटी मद्रास ने बड़ा कदम उठाया है। यहां संस्थान ने मंगलवार को परिसर में 3.30 करोड़ रुपए की लागत से यह प्रयोगशाला प्रारंभ की।

आईआईटी मद्रास का कहना है कि उन्होंने यह प्रयोगशाला बीक्टेल इंडिया के सीएसआर सहयोग से बनाई गई है। यहां निर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में रोबोटिक्स, स्वचालन और नई निर्माण तकनीकों पर काम होगा। यहां ऐसी तकनीक विकसित की जाएगी, जिसका इस्तेमाल वास्तविक निर्माण परियोजनाओं में किया जा सके। यानी शोध सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहेगा। नई तकनीकों को परखा जाएगा। उनके प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद उन्हें वास्तविक परियोजनाओं में इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

इस पहल में छात्रों और शोधकर्ताओं को भी सीधे फायदा मिलेगा। उन्हें उद्योग की वास्तविक समस्याओं पर काम करने का मौका मिलेगा। आईआईटी मद्रास के मुताबिक, बीक्टेल के विशेषज्ञ तकनीकी मार्गदर्शन देंगे। पाठ्यक्रम तैयार करने में उद्योग का अनुभव भी शामिल किया जाएगा। चयनित छात्रों के लिए इंटर्नशिप के अवसर तलाशे जाएंगे। इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा। प्रयोगशाला में संयुक्त शोध और तकनीकी विकास पर जोर रहेगा। यहां नए प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। शोध पत्र और पेटेंट भी सामने आ सकते हैं।

उद्योग के लिए तकनीकों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। आईआईटी मद्रास के डीन प्रो. अश्विन महालिंगम ने कहा कि उद्योग और अकादमिक संस्थानों की साझेदारी रोबोटिक्स जैसे विशेष क्षेत्रों में शोध को आगे बढ़ाने में अहम है। निर्माण क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों पर काम करने और नई तकनीकों को उपयोग के करीब लाने में मदद मिलेगी।

आईआईटी का कहना है कि यह सहयोग लंबे समय के लिए है। अगले पांच से दस वर्षों में उद्योग से जुड़े कई प्रोजेक्ट और तकनीकी अनुप्रयोगों पर काम करने की योजना है। इसका लक्ष्य निर्माण रोबोटिक्स और उन्नत इंजीनियरिंग के लिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल प्रतिभाएं तैयार करना भी है।प्रयोगशाला का नेतृत्व आईआईटी मद्रास के प्रो. टी. असोकन और प्रो. कोशी वर्गीज करेंगे।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी