आईआईटी मद्रास की मदद से मलेशिया में खुलेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र, समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। भारत और मलेशिया के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी को लेकर एक बड़ी शुरुआत हुई है। आईआईटी मद्रास की मदद से मलेशिया के जोहोर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक अत्याधुनिक व उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और संबंधित टैक्नोलॉजी के हब के रूप में कार्य करेगा।
जोहोर कॉरपोरेशन, मलेशिया के जोहोर राज्य की प्रमुख निवेश और विकास संस्था है। इस कदम से दोनों देशों के रिश्तों में अब एक नया और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। दरअसल इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मलेशिया यात्रा के बाद नई रफ्तार मिली। डिजिटल प्रौद्योगिकी और ज्ञान साझेदारी को लेकर दोनों देशों के बीच जो सहमति बनी थी, अब वह जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है।
कुआलालंपुर में आयोजित प्री-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं ने इस समझौते का मार्ग प्रशस्त किया है। यह पहल आईआईटी मद्रास के ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन और मलेशिया की जोहोर कॉरपोरेशन ने मिलकर की है। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसने इस महत्वाकांक्षी पहल को औपचारिक रूप दे दिया।
आईआईटी मद्रास का कहना है कि यह सिर्फ एक और तकनीकी परियोजना नहीं है, बल्कि ऐसा मंच तैयार करने की योजना है जहां रिसर्च प्रयोगशाला से निकलकर सीधे उद्योग और समाज तक पहुंचे। मलेशिया में भारत के उच्चायुक्त बी. एन. रेड्डी ने इसे दोनों देशों के बीच डिजिटल सहयोग की मजबूत होती कड़ी बताया।
उन्होंने कहा कि यह पहल मलेशिया व भारत डिजिटल परिषद के तहत चल रहे प्रयासों के अनुरूप है। इसके जरिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, साइबर सुरक्षा, डिजिटल प्रतिभा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई ऊंचाई दी जा रही है।
वहीं जोहोर कॉरपोरेशन के अधिकारियों का मानना है कि यह केंद्र राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी साबित हो सकता है। इससे नई तकनीकी क्षमताएं विकसित होंगी, स्थानीय प्रतिभाओं को प्रशिक्षण मिलेगा और उद्योगों को उन्नत समाधान उपलब्ध होंगे। प्रस्तावित उत्कृष्टता केंद्र रिस्पांसिबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मूल सिद्धांतों पर आधारित है।
यह निष्पक्षता, पारदर्शिता, सुरक्षा और सुशासन पर आधारित होगा। यहां अनुप्रयुक्त शोध, पेशेवर प्रशिक्षण, विशेषज्ञों का आदान-प्रदान, नवाचार-आधारित उद्यमों के साथ सहयोग और उद्योगों के लिए परीक्षण परियोजनाएं चलाई जाएंगी। यानी तकनीक को सिर्फ विकसित नहीं किया जाएगा, बल्कि उसे वास्तविक परिस्थितियों में परखा और लागू भी किया जाएगा।
आईआईटी मद्रास की ओर से कहा गया कि यह साझेदारी शोध, उद्योग और नीति को एक साथ लाने वाला मॉडल बनेगी। वहीं जोहोर कॉरपोरेशन राज्य में उद्योग और निवेश तंत्र को जोड़कर इस पहल को व्यावहारिक रूप देने में अहम भूमिका निभाएगा।
आईआईटी का मानना है कि यह कदम भारत और मलेशिया के बीच तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने वाला है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार आगे बढ़ा तो जोहोर जल्द ही दक्षिण–पूर्व एशिया में जिम्मेदार और अनुप्रयुक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
--आईएएनएस
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