आईआईएम की पहल: रेलवे, हॉस्पिटल, पंचायती राज और शिक्षा क्षेत्र में तैयार हो रहे प्रोफेशनल
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी आईआईएम में केंद्र व राज्य सरकारों से जुड़े संस्थानों के लिए प्रोफेशनल तैयार करेगा। इनमें रेलवे, हॉस्पिटल, शिक्षा आदि सेक्टर शामिल हैं। साथ ही सरकार के पंचायती राज कार्यक्रम से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देने की पहल की गई है। यह पहल आईआईएम काशीपुर ने शुरू की है।
यहां रेलवे प्रबंधन व हॉस्पिटल के लिए विशेष कार्यकारी एमबीए पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। आईआईएम का कहना है कि यह पाठ्यक्रम मेट्रो रेल, भारतीय रेल, हाई स्पीड रेल और विभिन्न रेल नेटवर्क के लिए उपयोगी है। यह पाठ्यक्रम सप्लाई चेन, रेलवे प्रशासन और बड़े प्रोजेक्ट्स के बेहतर संचालन में मदद कर सकता है।
वहीं हॉस्पिटल मैनेजमेंट पाठ्यक्रम स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है। इसके तहत अस्पतालों में मरीजों की सुविधा, संसाधनों का बेहतर उपयोग, आपातकालीन सेवाओं की दक्षता, डिजिटल हेल्थ सिस्टम और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण अस्पताल प्रबंधकों को ऐसे कौशल प्रदान करता है, जिससे वे संसाधनों का उपयोग बेहतर और तेज सेवाएं देने में कर सकें।
आईआईएम के निदेशक प्रोफेसर नीरज द्विवेदी के मुताबिक यहां छात्रों को यह सिखाया जा रहा है कि वे अपने करियर में न केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करें, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाएं। यही कारण है कि संस्थान शिक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। स्कूल और कॉलेजों के प्रिंसिपल्स व प्रोफेसर्स को आधुनिक प्रबंधन, नेतृत्व और संस्थागत विकास से जुड़े कौशल सिखाए जा रहे हैं। हाल ही में लगभग 500 सरकारी प्रिंसिपल्स व प्रोफेसर्स को प्रशिक्षित किया गया है। इस प्रशिक्षण में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार, नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षण तकनीकों के उपयोग और संस्थानों में बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे शिक्षा संस्थानों में नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की प्रक्रिया और अधिक मजबूत हो रही है। इस सब का लाभ यह होगा कि कक्षा में सीखी जा रही पढ़ाई सीधे जमीनी बदलावों से जुड़ेगी। चाहे वह रेल की रफ्तार बढ़ाना हो, अस्पतालों की व्यवस्था सुधारना हो या शिक्षा और गांवों के विकास को नई दिशा देना हो।
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अंतरिम अध्यक्ष संदीप सिंह के मुताबिक, आईआईएम में अलग-अलग बैकग्राउंड के छात्र आ रहे हैं। इनमें इंजीनियर, आईटी सेक्टर व इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी समेत अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहे प्रोफेशनल शामिल हैं। इस वर्ष यहां 546 विद्यार्थियों को विभिन्न प्रबंधन और शोध कार्यक्रमों में डिग्रियां प्रदान की गईं। इस वर्ष स्नातक होने वाले विद्यार्थियों में 280 एमबीए, 160 एमबीए (एनालिटिक्स), 34 कार्यकारी एमबीए, 58 कार्यकारी एमबीए (एनालिटिक्स) और 14 पीएचडी के विद्यार्थी शामिल रहे।
गौरतलब है कि एमबीए (एनालिटिक्स) कार्यक्रम में 73 प्रतिशत से अधिक छात्राएं शामिल रहीं, जबकि पूरे बैच में महिलाओं की हिस्सेदारी 39.19 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष के 33 प्रतिशत से अधिक है। यह प्रबंधन और डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। इस बैच के लिए संस्थान का अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण रहा, जिसके तहत 73 लाइव प्रोजेक्ट्स में 300 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से ग्रामीण विकास और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के विकास जैसे क्षेत्रों में काम किया गया।
--आईएएनएस
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