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बेटी घरेलू हिंसा की शिकायत करे तो माता-पिता उसे चुप न कराएं, वीडियो में जाने शादी से ज्यादा जरूरी सुरक्षा और सम्मान: दिल्ली हाईकोर्ट

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर कोई बेटी अपनी शादी में हिंसा या प्रताड़ना की शिकायत करती है, तो माता-पिता को उसकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए। उसे शादी बचाने के नाम पर समझौता करने या चुप रहने की सलाह नहीं देनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि बेटी का मायके लौटना परिवार के लिए शर्मिंदगी की बात नहीं है। शादी से ज्यादा जरूरी महिला की सुरक्षा, गरिमा और सम्मान है।

जस्टिस मधु जैन ने ये टिप्पणियां 2018 में जर्मन एयरलाइन में काम करने वाली फ्लाइट अटेंडेंट अनिसिया बत्रा की आत्महत्या से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कीं। अदालत ने कहा कि किसी महिला को मदद देने के लिए परिवार को किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार नहीं करना चाहिए।

2018 में दक्षिण दिल्ली स्थित घर में हुई थी मौत

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अनिसिया बत्रा ने 13 जुलाई 2018 को दक्षिण दिल्ली के पंचशील पार्क स्थित अपने घर में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। उनके माता-पिता ने आरोप लगाया था कि उनके पति मयंक सिंघवी उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे।घटना के बाद मयंक उन्हें अस्पताल लेकर गए थे, जहां डॉक्टरों ने अनिसिया को मृत घोषित कर दिया था। मामले में अनिसिया के पति पर क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए गए थे।

पति को आरोपों से किया बरी

अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद पति मयंक सिंघवी को क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों से बरी कर दिया। इस मामले में फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा की शिकायतों को गंभीरता से लेने और पीड़ित महिला को परिवार का सहयोग मिलने की जरूरत पर जोर दिया।

शादी बचाने के दबाव में न करें महिला की अनदेखी

हाईकोर्ट की टिप्पणी का मुख्य संदेश यह था कि घरेलू हिंसा या प्रताड़ना की शिकायत करने वाली महिला पर शादी बचाने के लिए समझौता करने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। माता-पिता को बेटी की परेशानी सुननी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उसे सुरक्षित माहौल और जरूरी मदद उपलब्ध करानी चाहिए।अदालत ने कहा कि महिला की सुरक्षा और सम्मान को वैवाहिक रिश्ते से ऊपर रखा जाना चाहिए। बेटी का मुश्किल समय में मायके लौटना किसी परिवार की प्रतिष्ठा से जुड़ा सवाल नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का अवसर है।