‘थाना देखना चाहता हूं…’ SHO ने पूरी की एक दिव्यांग की इच्छा, इंसानियत की मिसाल बना पुलिस विभाग
पुलिस की छवि अक्सर सख्ती और कानून व्यवस्था से जुड़ी रहती है, लेकिन कई बार वर्दी के पीछे छिपी इंसानियत ऐसे उदाहरण पेश करती है, जो दिल को छू जाते हैं। ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायक मामला नोएडा से सामने आया है, जहां एक दिव्यांग युवक की छोटी-सी इच्छा को थाना प्रभारी (SHO) ने खास बनाकर पूरी की।
जानकारी के मुताबिक, दिव्यांग युवक लंबे समय से पुलिस थाना देखने और वहां के कामकाज को करीब से समझने की इच्छा रखता था। उसका सपना था कि वह एक बार थाने का माहौल देखे और पुलिसकर्मियों से मिले। परिवार के लोगों ने जब उसकी इस इच्छा के बारे में स्थानीय थाना प्रभारी को बताया, तो SHO ने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत पहल की।
SHO ने युवक को परिवार सहित थाने में आमंत्रित किया और पूरे सम्मान के साथ उसका स्वागत किया। थाने पहुंचते ही पुलिसकर्मियों ने उसे गर्मजोशी से रिसीव किया, जिससे युवक के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। अधिकारियों ने उसे थाने के विभिन्न विभागों का दौरा कराया और समझाया कि किस तरह पुलिस शिकायत दर्ज करती है, जांच करती है और कानून व्यवस्था बनाए रखती है।
इतना ही नहीं, SHO ने युवक को अपनी कुर्सी पर बैठाया और उससे बातचीत भी की। पुलिस की गाड़ी और उपकरण भी दिखाए गए, जिससे वह बेहद उत्साहित नजर आया। कुछ समय के लिए उसे ‘मानद पुलिस अधिकारी’ जैसा अनुभव दिया गया। इस दौरान युवक की मुस्कान और उत्साह ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि यह पल उनके लिए बेहद खास था। उन्होंने पुलिस विभाग का आभार जताते हुए कहा कि उनकी उम्मीद नहीं थी कि पुलिस इतनी संवेदनशीलता के साथ उनकी बात सुनेगी और इतनी जल्दी उनकी मदद करेगी।
स्थानीय लोगों ने भी SHO की इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि ऐसे छोटे-छोटे कदम समाज में पुलिस के प्रति विश्वास और सम्मान को बढ़ाते हैं। अक्सर पुलिस की सख्त छवि के बीच इस तरह की मानवीय पहल लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ती है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि समाज के हर वर्ग के लोगों की मदद करना उनकी जिम्मेदारी है। अगर किसी की छोटी-सी इच्छा भी पूरी करके उसे खुशी दी जा सकती है, तो यह उनके लिए गर्व की बात है।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वर्दी के पीछे भी एक संवेदनशील दिल धड़कता है। SHO की इस पहल ने न सिर्फ एक दिव्यांग युवक का सपना पूरा किया, बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे की डोर को भी मजबूत किया है।