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Hyderabad Water Crisis: मानसून के बाद ही गहराया जलसंकट, रोजाना 8 हजार टैंकरों की बुकिंग

 

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में मानसून खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद पानी की किल्लत गंभीर रूप लेने लगी है। आमतौर पर गर्मियों में बढ़ने वाली टैंकरों की मांग इस बार अक्टूबर में ही तेजी से बढ़ गई है। जल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में रोजाना करीब 8 हजार पानी के टैंकर बुक हो रहे हैं। इसका असर घरों, अपार्टमेंट, दफ्तरों और शैक्षणिक संस्थानों पर पड़ रहा है।

एक साल में टैंकरों की मांग 233% बढ़ी

जल बोर्ड के अनुसार, अक्टूबर में अब तक 62,565 टैंकरों की बुकिंग दर्ज की गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 18,806 था। इस तरह टैंकरों की मांग में करीब 233 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बोडुप्पल इलाके में स्थिति और गंभीर है, जहां पिछले साल की तुलना में टैंकरों की मांग 22 गुना तक बढ़ने की जानकारी सामने आई है।

पानी की कमी का असर बासर यूनिवर्सिटी पर भी पड़ा है। संस्थान को रोजाना करीब 25 लाख लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन फिलहाल केवल 10 लाख लीटर पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। ऐसे में सोमवार से कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने का फैसला लिया गया है।

20 हजार बोरवेल सूखे, भूजल स्तर में भी गिरावट

हैदराबाद में तेजी से बढ़ते रिहायशी और आईटी क्षेत्रों में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। अपार्टमेंट और कार्यालयों की टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शहर में करीब 20 हजार बोरवेल सूख चुके हैं। जल बोर्ड ने लोगों से पानी की खपत 20 प्रतिशत तक कम करने की अपील की है।

इस साल शहर में सामान्य से कम बारिश भी संकट की बड़ी वजह बनी है। सामान्य 627 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले इस बार 458 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो करीब 27 प्रतिशत कम है। शहर के 16 मंडलों में से 13 में सामान्य से कम बारिश हुई। चारमीनार में बारिश की कमी 39 प्रतिशत और सैदाबाद में 38 प्रतिशत रही।

सितंबर 2025 की तुलना में सितंबर 2026 में ग्रेटर हैदराबाद और आसपास के शहरी इलाकों का औसत भूजल स्तर 22.5 फीट नीचे जाने की बात सामने आई है। कम बारिश, बढ़ती आबादी और भूजल के लगातार दोहन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

घरों में अवैध बोरवेल लगाकर पानी बेचने का आरोप

पानी की किल्लत के बीच कुछ इलाकों में अवैध रूप से पानी बेचने का मामला भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुन्नम चेरुवु झील के आसपास कुछ घरों में बिस्तर के नीचे और रसोई के भीतर बोरवेल लगाए गए थे। इनसे पाइपलाइन के जरिए पानी स्टोरेज टैंकों तक पहुंचाया जाता और फिर बड़े टैंकरों में भरकर बेचा जाता था।

बताया गया है कि ड्रोन की मदद से इस कथित नेटवर्क का पता लगाया गया। इसके बाद 15 बोरवेल और उनसे जुड़ी पाइपलाइनें हटाई गईं।

सिंगूर जलाशय में बचा सिर्फ 11% पानी

हैदराबाद की जलापूर्ति के प्रमुख स्रोतों में शामिल सिंगूर जलाशय में भी पानी का भंडार तेजी से घट रहा है। इसकी कुल क्षमता 29.91 टीएमसी बताई गई है, जबकि 17 अक्टूबर को इसमें केवल 3.416 टीएमसी पानी बचा था। यह कुल क्षमता का लगभग 11 प्रतिशत है।

आकलन के अनुसार, मौजूदा दर से पानी की निकासी जारी रहने पर जलाशय से सामान्य आपूर्ति 9 नवंबर तक ही संभव हो सकती है। इसके बाद विशेष पंपों की मदद से पानी निकालकर 10 दिसंबर तक आपूर्ति जारी रखने की संभावना जताई गई है।

देश के प्रमुख जलाशयों में भी पानी की कमी

जल संकट केवल हैदराबाद तक सीमित नहीं है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 178 प्रमुख जलाशयों में 123.2 अरब घनमीटर पानी उपलब्ध था, जो उनकी कुल क्षमता का करीब 67 प्रतिशत है। पिछले साल इसी अवधि में जलस्तर लगभग 93 प्रतिशत था।

दक्षिण भारत के जलाशयों की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के 50 जलाशयों में कुल क्षमता का करीब 42 प्रतिशत पानी बचा होने की जानकारी दी गई है।

कम बारिश और घटते भूजल स्तर के बीच हैदराबाद के सामने आने वाले दिनों में जलापूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में पानी का सीमित और जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना जरूरी होगा।