हम रक्षा क्षेत्र में किसी भी देश पर निर्भर नहीं रह सकतेः राजनाथ सिंह
नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि अब हमारी सोच यह नहीं होनी चाहिए कि भारत को दुनिया से क्या खरीदना है। हमारी सोच यह होनी चाहिए कि दुनिया भारत से क्या खरीदना चाहती है। स्वदेशी हथियार हमारे लिए कितने जरूरी हैं, इसका उदाहरण हमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत की स्वदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमता देखी।
राजनाथ सिंह ने यह बात रविवार को पांच रक्षा प्रोजेक्टों का शिलान्यास करने के दौरान कहीं। जिनका शिलान्यास किया गया वे पश्चिम बंगाल स्थित जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड की 5 नई फैसिलिटी हैं। जीआरएसई देश के प्रमुख युद्धपोत निर्माण प्रतिष्ठानों में शामिल है। जीआरएसई के पास 800 से अधिक जहाजों के निर्माण का अनुभव है। यहां राजनाथ सिंह ने कहा, हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि क्वालिटी ऐसी कि दुनिया भरोसा करे, कीमत ऐसी कि दुनिया चुने और डिलीवरी ऐसी कि दुनिया बार-बार ऑडर करे।
उन्होंने बताया जीआरएसई पास तकनीकी जानकारी है, कुशल कार्यबल है और अब विस्तारित क्षमता भी होगी। आपको इसका पूरा उपयोग करना होगा। आप अभी नौसेना के ऑर्डर के साथ-साथ, एक जर्मन कंपनी के लिए 12 मालवाहक जहाज बना रहे हैं। यह बिल्कुल हमारी मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड, विजन के अनुरूप है। जैसे-जैसे आपकी क्षमता बढ़ेगी, आपको घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों में अधिक आक्रामक बोली लगानी होगी।
राजनाथ सिंह ने कहा, “आगे भी, रक्षा मंत्रालय के साथ, हमारी प्रयोगशालाएं, हमारे सार्वजनिक उपक्रम, और निजी हितधारक मिलकर, अपनी सेनाओं को स्वदेशी प्लेटफॉर्म से लैस करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हमने यह साबित किया है कि आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं है। आत्मनिर्भरता, युद्धक्षेत्र क्षमता का गुणक है। और इस पहल में जीआरएसई, तथा यंत्र इंडिया लिमिटेड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है।”
रक्षामंत्री ने कहा कि यदि हम हिंद महासागर क्षेत्र में जहाज मरम्मत और ओवरहॉल का केंद्र बन जाएं, तो विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ, हजारों रोजगार पैदा होंगे। आज भी हमारे बनाए युद्धपोत, दुनिया के संघर्ष क्षेत्रों से होकर हमारी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम रक्षा क्षेत्र में किसी भी देश पर निर्भर नहीं रह सकते। हमारी अपनी स्वदेशी कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों को ही इस क्षेत्र में पूरी तरह प्रभुत्व हासिल करना होगा। और आज के ये पांचों परियोजनाएं उसी रणनीतिक स्वायत्तता को प्रतिबिंबित कर रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने बताया, “आज हम, लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपयों की लागत वाली पांच अत्यंत महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास कर रहे हैं। इनमें जीआरएसई की तीन नई जहाज निर्माण सुविधाएं - रायचक शिपयार्ड, टिम्बर पोंड हावड़ा जहाज निर्माण सुविधा और दामोदर कॉम्प्लेक्स जहाज निर्माण सुविधा शामिल हैं। इसके साथ ही यंत्र इंडिया लिमिटेड की दो अत्याधुनिक धातुकर्म सुविधाओं, 3,000 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक ओपन डाई फोर्जिंग प्रेस और रेडियल फोर्जिंग प्लांट, का भी शिलान्यास हो रहा है। ये पांचों परियोजनाएं आत्मनिर्भरता, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की भावना को बल देने वाली हैं।”
उन्होंने कहा कि जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड जैसे संस्थान, इस बात के प्रमाण हैं, कि बंगाल का औद्योगिक आधार फिर से मजबूत हो रहा है। यहां से शुरू होने वाले ये परियोजनाएं, रक्षा उत्पादन को तो बढ़ाएंगे ही, साथ ही साथ एमएसएमई, संबद्ध उद्योगों और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगे। एक तरह से देखें, तो ये परियोजनाएं, बंगाल की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के, नए अध्याय के रूप में सामने आने वाले हैं।
--आईएएनएस
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