ट्रेन चलाने में कितना डीजल लगता है? जानिए ट्रेन का माइलेज और कुछ रोचक तथ्य
भारतीय रेल नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित नेटवर्कों में से एक है। रोज़ाना लाखों यात्री और टन माल सामान रेलवे के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि डीजल इंजन वाली ट्रेनों को चलाने के लिए कितना डीजल खर्च होता है, या ट्रेन का माइलेज होता कितना है? इस रिपोर्ट में हम इसी विषय पर आसान भाषा में बातें समझेंगे — जिससे आपको ट्रेन की ईंधन खपत के बारे में एक स्पष्ट विचार मिल सके।
🛤️ ट्रेन का डीजल टैंक कितना बड़ा होता है?
डीजल इंजन वाली ट्रेन में एक विशाल फ्यूल टैंक होता है। आम तौर पर ऐसे लोकोमोटिव में 5,000 से 6,300 लीटर तक डीजल भर सकता है। इतना बड़ा टैंक इसलिए होता है क्योंकि ट्रेन को लंबी दूरी तय करनी होती है और हर स्टेशन पर बार-बार डीजल भरना संभव नहीं होता।
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, एक भारी डीजल लोकोमोटिव एक घंटे में लगभग 600 से 700 लीटर डीजल तक खर्च कर सकता है, जो कि एक बड़े इंजन की शक्ति और काबिलियत को दर्शाता है।
🛠️ ट्रेन का माइलेज कितना होता है?
ट्रेन का माइलेज (डीजल की खपत बनाम दूरी) ट्रेन के प्रकार, डिब्बों की संख्या, रुक-रुक कर चलने और वजन पर निर्भर करता है। आम तौर पर दिए गए अनुमान के अनुसार:
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पैसेंजर ट्रेन: लगभग 6 लीटर डीजल प्रति किलोमीटर
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एक्सप्रेस ट्रेन: लगभग 4.5 लीटर डीजल प्रति किलोमीटर
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कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि भारी ट्रेनों में जो बार-बार रुकती-चलती हैं, उनमें 1 किलोमीटर के लिए लगभग 5-6 लीटर डीजल का उपयोग होता है।
यह तथ्य बताता है कि ट्रेनें भारी वजन और लंबी दूरी पर चलने के कारण अपेक्षाकृत अधिक ईंधन खर्च करती हैं — खासकर डीजल इंजन वाली ट्रेनें, जो रुक-रुक कर चलने पर अधिक डीजल खर्च कर सकती हैं।
🚆 एक बार टैंक भरने पर कितनी दूरी तय की जा सकती है?
टैंक क्षमता और ट्रेन की खपत को ध्यान में रखते हुए, अगर डीजल टैंक फुल है तो एक ट्रेन आम तौर पर 800 से 1,500 किलोमीटर तक या उससे भी अधिक दूरी तय कर सकती है। यह दूरी ट्रेन के प्रकार, लोड और रूट की स्थिति के हिसाब से थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकती है।