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बीसलपुर बांध का इतिहास: राजस्थान की लाइफलाइन कैसे बना यह बांध, वीडियो में जाने जयपुर समेत कई जिलों को मिलता है पानी

 

राजस्थान के टोंक जिले में स्थित बीसलपुर बांध प्रदेश की प्रमुख जल परियोजनाओं में से एक है। बनास नदी पर बना यह बांध जयपुर, अजमेर और टोंक सहित कई क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति और खेती के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर के लिए इसका विशेष महत्व है, इसलिए इसे अक्सर शहर की ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है। 

कहां स्थित है बीसलपुर बांध?
बीसलपुर बांध राजस्थान के टोंक जिले में देवली के पास बनास नदी पर बनाया गया है। यह एक ग्रेविटी डैम है, यानी ऐसा बांध जो अपने वजन के सहारे पानी के दबाव को रोकता है। इसका निर्माण पेयजल आपूर्ति और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से किया गया था। 

कब शुरू हुआ था निर्माण?

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बीसलपुर बांध परियोजना का शिलान्यास वर्ष 1985 में राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने किया था। निर्माण कार्य 1987 में शुरू हुआ और बांध का निर्माण 1999 में पूरा हुआ। वर्ष 2004 में यह पहली बार पूरी क्षमता तक भरा था। स परियोजना को तैयार करने का मुख्य उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों तक पानी पहुंचाना था, जहां पेयजल की जरूरतों के साथ सिंचाई के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं था। बांध के निर्माण से राजस्थान के कई जिलों में जल प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिली।

जयपुर के लिए क्यों खास है बीसलपुर बांध?
बीसलपुर बांध से जयपुर शहर को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा अजमेर और टोंक जिलों तथा रास्ते में आने वाले कई कस्बों और गांवों को भी इससे पानी मिलता है। परियोजना से जुड़े सरकारी विवरणों के अनुसार, बांध का पानी सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। 

जयपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में पेयजल की मांग लगातार महत्वपूर्ण बनी रहती है। ऐसे में बीसलपुर बांध शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था का प्रमुख स्रोत है। बांध में पर्याप्त पानी होने से शहर और आसपास के क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है, जबकि कम बारिश के दौरान जल प्रबंधन की चुनौती बढ़ जाती है।

बांध की प्रमुख विशेषताएं
बीसलपुर बांध की लंबाई लगभग 574 मीटर है और इसकी ऊंचाई करीब 39.5 मीटर बताई जाती है। इसकी कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 1,095.84 मिलियन घन मीटर है। बांध से सिंचाई के लिए दाईं और बाईं मुख्य नहरें भी जुड़ी हुई हैं। यह परियोजना केवल पेयजल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों से भी जुड़ी है। सिंचाई के लिए पानी मिलने से खेती को सहारा मिलता है और जल उपलब्धता का स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है।

बीसलपुर बांध का पर्यावरणीय महत्व
बीसलपुर जलाशय के आसपास का क्षेत्र पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार, यहां पक्षियों की 100 से अधिक प्रजातियां देखी जा सकती हैं। जलाशय और आसपास का प्राकृतिक वातावरण इसे पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षक बनाता है। हालांकि, बांध का पानी सीमित संसाधन है। बारिश, जलाशय में पानी की आवक, पेयजल की मांग और सिंचाई की जरूरतों के आधार पर इसका प्रबंधन करना जरूरी होता है।बीसलपुर बांध आज राजस्थान की महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में गिना जाता है। वर्ष 1999 में निर्माण पूरा होने के बाद से यह पेयजल आपूर्ति और सिंचाई में अहम भूमिका निभा रहा है। खासकर जयपुर के लिए इसकी उपयोगिता इसे प्रदेश की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल करती है।