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भारत-यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, फुटेज में जानें 18 साल बाद बनी सहमति

 

भारत और यूरोपीय संघ (European Union) के बीच 18 वर्षों से चल रही लंबी और जटिल बातचीत के बाद आखिरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर सहमति बन गई है। मंगलवार को आयोजित 16वें भारत-EU समिट के दौरान दोनों पक्षों ने इस ऐतिहासिक समझौते का औपचारिक ऐलान किया। यह डील भारत और यूरोप के आर्थिक रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, इस समझौते को 2027 तक लागू किए जाने की संभावना है।

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FTA के तहत दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के बाजारों को और अधिक खोलने पर सहमति जताई है। इसका सीधा फायदा व्यापार, निवेश और रोजगार पर पड़ने की उम्मीद है। खासतौर पर भारत में यूरोपीय उत्पादों के सस्ते होने की संभावना जताई जा रही है। इस डील के बाद भारत में यूरोपीय लग्जरी कारों जैसे BMW, मर्सिडीज-बेंज और ऑडी पर लगने वाला भारी आयात शुल्क कम किया जाएगा। फिलहाल इन कारों पर करीब 110 प्रतिशत तक टैक्स लगता है, जिसे घटाकर लगभग 10 प्रतिशत करने पर सहमति बनी है। इससे भारतीय बाजार में यूरोपीय कारें काफी सस्ती हो सकती हैं और ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

इसके अलावा, शराब और वाइन के आयात को लेकर भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्तमान में यूरोप से आने वाली शराब पर भारत में करीब 150 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाता है। FTA के लागू होने के बाद इस टैरिफ को घटाकर 20 से 30 प्रतिशत के बीच लाने का प्रस्ताव है। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को यूरोपीय शराब और वाइन कम कीमत पर मिल सकेगी, जबकि यूरोपीय कंपनियों के लिए भारतीय बाजार और आकर्षक बन जाएगा।

भारत और यूरोपीय संघ, दोनों ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं। भारत इस समय दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि यूरोपीय संघ दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में जाना जाता है। दोनों मिलकर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं और दुनिया के कुल व्यापार का करीब एक-तिहाई योगदान देते हैं। ऐसे में यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन पर भी असर डालेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत के मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी और सर्विस सेक्टर को बड़ा फायदा हो सकता है। वहीं, यूरोपीय कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इसके साथ ही निवेश, तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करने में भी यह डील मददगार साबित होगी।

हालांकि, FTA के पूरी तरह लागू होने से पहले कई तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी हैं। दोनों पक्षों को घरेलू उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाना होगा। बावजूद इसके, 18 साल बाद बनी यह सहमति भारत-EU संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकती है।