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विपक्ष की आवाज दबाने के लिए वाईएसआरसीपी को नहीं दिया जा रहा एलओपी का दर्जा: जगन मोहन रेड्डी

 

अमरावती, 12 अगस्त (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने बुधवार को कहा कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए वाईएसआरसीपी को विपक्ष के नेता (एलओपी) का दर्जा देने को तैयार नहीं है।

जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि वह जनता के मुद्दों को मीडिया के माध्यम से उठाना जारी रखेंगे।

17 अगस्त से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र से पहले पार्टी विधायकों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने पार्टी के विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) को सतर्क रहने, जनहित के मुद्दे उठाने और विधान परिषद में नायडू सरकार की विफलताओं को उजागर करने का निर्देश दिया।

वाईएसआरसीपी लगभग दो वर्षों से विपक्ष के नेता का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार कर रही है।

जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार प्रमुख विपक्षी दल वाईएसआरसीपी को एलओपी का दर्जा नहीं देना चाहती ताकि उसकी आवाज को दबाया जा सके। उन्होंने कहा कि वह जनता के सामने "सिक्के का दूसरा पहलू" रखने के लिए मीडिया के जरिए मुद्दे उठाते रहेंगे।

उन्होंने कहा, "विधान परिषद में हमारी पर्याप्त संख्या है। इसलिए हमें जनता की आवाज बनना चाहिए और उन मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहिए जिन्हें हम लगातार उठा रहे हैं। इनमें डीएससी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं भी शामिल हैं, जिसके खिलाफ हमने पिछले 74 दिनों में 10 तरह के विरोध प्रदर्शन किए हैं और अपने पक्ष को साबित करने के लिए सभी सबूत भी पेश किए हैं।"

उन्होंने कहा, "हमने प्रश्नपत्र लीक और आउटसोर्सिंग घोटालों, खेल कोटा में अनियमितताओं और सरकारी आदेशों में बदलाव जैसे मामलों को उजागर किया है। साथ ही, हमने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटे और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश की भूमिका की जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है।"

वाईएसआरसीपी प्रमुख ने पार्टी विधायकों से कहा कि वे फीस प्रतिपूर्ति और 'वसति दीवेना' योजना के मुद्दे उठाएं, क्योंकि लंबित भुगतान के कारण छात्र बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि फीस प्रतिपूर्ति के 13 तिमाहियों के लंबित बिल 9,100 करोड़ रुपए से अधिक और वसति दीवेना के लंबित बिल 3,300 करोड़ रुपए से अधिक हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक केवल 2,900 करोड़ रुपए जारी किए हैं। उन्होंने एमएलसी से यह मुद्दा सदन में उठाने और इस पर चर्चा की मांग करने को कहा।

जगन मोहन रेड्डी ने कहा, "किसानों के मुद्दे पर भी हमें आवाज उठानी होगी, क्योंकि किसी भी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं मिल रहा है, पर्याप्त सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है और मुफ्त फसल बीमा योजना भी बंद कर दी गई है, जिससे किसान परेशानियों में हैं।"

उन्होंने कहा कि पीपीपी परियोजनाओं को व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वायबिलिटी गैप फंडिंग) और निजी कंपनियों को अन्य रियायतें देने से बोझ आखिरकार जनता पर पड़ता है। सरकार की सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण की योजनाओं पर भी कड़ा सवाल उठाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दिशा विधेयक को वापस लेने और पिछड़ा वर्ग (बीसी) समुदाय के लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया जाना चाहिए, क्योंकि सरकार से सवाल पूछने वालों के खिलाफ अन्यायपूर्ण और बदले की भावना से मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि चिंताडा रवि और मुस्तफा के खिलाफ दर्ज मामले मनगढ़ंत हैं और पिछड़े वर्ग के नेताओं को निशाना बनाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।

वाईएस जगन ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल, कर्मचारियों में असंतोष, महिलाओं, युवाओं और बेरोजगारों की नाराजगी सहित सभी वर्गों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए।

उन्होंने विधायकों से कहा कि वे सभी जरूरी आंकड़ों और तथ्यों के साथ पूरी तैयारी करके सदन में जाएं तथा सरकार और उसकी विफलताओं को बेनकाब करें।

--आईएएनएस

एएमटी/पीएम