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ऊर्जा कीमतों में नरमी के चलते जुलाई में डब्ल्यूपीआई में आई कमी, आगे और नरमी की उम्मीद: विशेषज्ञ

 

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। भारत की थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर जुलाई 2026 में मामूली घटकर 9.78 प्रतिशत रह गई, जो जून में 9.87 प्रतिशत थी। अर्थशास्त्रियों और उद्योग संगठनों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में नरमी आने से थोक महंगाई पर दबाव कुछ कम हुआ है और आने वाले महीनों में इसमें धीरे-धीरे और कमी देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई में महंगाई दर में आई नरमी का सबसे बड़ा कारण ईंधन और ऊर्जा श्रेणी में महंगाई का तेज़ी से कम होना रहा। इस श्रेणी की महंगाई जून के 27.41 प्रतिशत से घटकर जुलाई में 20.05 प्रतिशत पर आ गई। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल, खनिज तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में आई नरमी का इसका प्रमुख योगदान माना जा रहा है।

केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि ईंधन एवं ऊर्जा महंगाई में गिरावट मुख्य रूप से खनिज तेल, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में कमी का परिणाम है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां अभी भी अस्थिर बनी हुई हैं और ऊर्जा कीमतों की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर निर्भर करेगी।

वहीं दूसरी ओर, विनिर्मित उत्पादों में महंगाई बढ़ी है। इसका कारण उद्योगों द्वारा बढ़ी हुई इनपुट लागत को अंतिम उत्पादों की कीमतों में शामिल किया जाना माना जा रहा है। जुलाई में विनिर्माण क्षेत्र की महंगाई बढ़कर 8.29 प्रतिशत हो गई। साथ ही खाद्य महंगाई भी अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बनी रही और खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 5.4 प्रतिशत दर्ज की गई।

उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने भी कहा कि थोक महंगाई में आई कमी का प्रमुख कारण ऊर्जा लागत में नरमी है। संगठन के अनुसार, इससे उद्योगों पर लागत संबंधी दबाव कुछ कम होने के संकेत मिलते हैं।

पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र अभी भी ऊंची इनपुट लागत का सामना कर रहा है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हालिया मौद्रिक नीति के तटस्थ रुख से उद्योगों को स्थिर ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध होने में मदद मिलेगी, जिससे उत्पादन गतिविधियों को समर्थन मिलेगा।

संगठन ने यह भी कहा कि रसायन एवं रासायनिक उत्पाद, बेसिक मेटल्स और इलेक्ट्रिकल उपकरणों में महंगाई बढ़ना औद्योगिक मांग की मजबूती को दर्शाता है। विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा और उससे जुड़ी सप्लाई चेन में बढ़ती गतिविधियों का असर इन क्षेत्रों में देखा जा रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई 8.52 प्रतिशत रही, जबकि खाद्य वस्तुओं की महंगाई 5.44 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं खाद्य उत्पाद निर्माण क्षेत्र में महंगाई 8.89 प्रतिशत रही, जो इस बात का संकेत है कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।

आगे की तस्वीर पर नजर डालें तो विशेषज्ञों का मानना है कि थोक महंगाई अभी ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी, लेकिन इसमें धीरे-धीरे नरमी आने के संकेत मिल रहे हैं। ऊर्जा लागत में कमी, घरेलू आपूर्ति स्थितियों में सुधार और कई कच्चे माल की कीमतों में नरमी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

पीएचडीसीसीआई के सीईओ और महासचिव रंजीत मेहता ने कहा कि फिलहाल तस्वीर "ऊंची लेकिन धीरे-धीरे कम होती महंगाई" की ओर इशारा कर रही है। उनके अनुसार, यदि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता बनी रहती है और घरेलू आपूर्ति में सुधार जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में थोक महंगाई पर दबाव और कम हो सकता है।

--आईएएनएस

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