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महिला आरक्षण भाजपा की मूल वैचारिक आस्था: जितेंद्र सिंह

 

शिमला, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लेकर कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन पर जुबानी हमला किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रस्तावित कानून महज एक नीतिगत पहल नहीं है, यह भाजपा की मूल वैचारिक प्रतिबद्धता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' के दृष्टिकोण का प्रतीक है।

मीडिया से बातचीत के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2014 से मोदी सरकार ने नीतियों को बनाने और लागू करने के केंद्र में महिलाओं को रखकर, शासन के तरीके में बुनियादी बदलाव किया है। महिलाएं अब सिर्फ निष्क्रिय लाभार्थी नहीं हैं; वे भारत की विकास यात्रा की सक्रिय निर्माता हैं। यह बदलाव एक सोची-समझी और लगातार अपनाई गई नीति का नतीजा है।

प्रधानमंत्री मोदी के 2014 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि शौचालयों के निर्माण पर दिया गया जोर, विशेष रूप से महिलाओं के लिए, शासन की प्राथमिकताओं में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।

उन्होंने कहा कि उस समय जो बात अपरंपरागत लग रही थी, आज वह लाखों महिलाओं के लिए गरिमा, सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में बदल गई है। इस दौरान उन्होंने 'स्वच्छ भारत मिशन' के स्वच्छता और लड़कियों की शिक्षा पर पड़े प्रभाव को रेखांकित किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के परिवर्तनकारी प्रभाव पर जोर देते हुए कहा कि इस योजना ने महिलाओं को घर के अंदर होने वाले खतरनाक प्रदूषण से मुक्ति दिलाई, उनके स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार किया और उन्हें आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने में सक्षम बनाया। यह कोई मामूली बदलाव नहीं है, यह तो जमीनी स्तर पर एक ढांचागत परिवर्तन है।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के पास हमेशा से महिलाओं की अपार और अप्रयुक्त क्षमता मौजूद रही है, लेकिन इसे बढ़ावा देने वाले जरूरी ढांचों की कमी थी। पिछले एक दशक में मोदी सरकार ने इस क्षमता को उजागर किया है, जो सिविल सेवाओं, स्टेम शिक्षा, अनुसंधान और यहां तक कि सशस्त्र बलों में अग्रिम पंक्ति की लड़ाकू भूमिकाओं में महिलाओं की बढ़ती संख्या से साफ जाहिर होता है।

उन्होंने कहा कि भारत की महिलाएं हाशिए से मुख्यधारा में आई हैं और अब नेतृत्व की भूमिका में हैं। 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर उन्होंने कहा कि इस कानून को शासन और निर्णय-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को संस्थागत रूप देने के लिए तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देश इस ऐतिहासिक छलांग के लिए तैयार था, विपक्ष ने सहयोग के बजाय बाधा डालना चुना। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर महिला सशक्तिकरण से ऊपर राजनीतिक नफा-नुकसान को रखने का आरोप लगाया।

उन्होंने विपक्ष के रवैये को ऐतिहासिक विश्वासघात बताते हुए कहा कि जहां एक ओर कांग्रेस 50 से भी ज्यादा सालों से महिलाओं के लिए आरक्षण की बात करती रही है। वहीं दूसरी ओर वह इसे लागू करने में लगातार नाकाम रही है।

उन्होंने आगे कहा कि जब एक भरोसेमंद, संवैधानिक रूप से मान्य और अच्छी तरह से शोध किया हुआ ढांचा पेश किया गया, तो उन्होंने प्रक्रिया से जुड़े बहाने और ध्यान भटकाने वाले तर्क देने शुरू कर दिए। इससे उनकी नीयत की कमी साफ जाहिर होती है।

--आईएएनएस

पीएसके