दिल्ली विधानसभा में अनोखा क्षण: महिला विधायक शिखा रॉय ने संभाली सदन की कमान
नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर आयोजित विशेष सत्र के दौरान एक उल्लेखनीय मिसाल कायम की। उन्होंने ग्रेटर कैलाश की विधायक शिखा रॉय को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता करने के लिए आमंत्रित किया।
इस पहल का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को अहमियत देना और उसके महत्व को रेखांकित करना था, जो सदन की चर्चाओं का एक केंद्रीय विषय है।
रॉय ने 'चेयरपर्सन-इन-चेयर' के रूप में कार्यवाही का संचालन किया, जो विधायी कार्यप्रणाली में समावेशिता और महिलाओं के नेतृत्व को मान्यता देने के प्रति विधानसभा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने इस अवसर और उन पर जताए गए विश्वास के लिए स्पीकर के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। स्पीकर की इस दुर्लभ और प्रतीकात्मक पहल ने शासन-प्रशासन में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और भागीदारी को बढ़ावा देने के प्रति विधानसभा की प्रतिबद्धता को उजागर किया।
बयान में कहा गया कि यह विधायी मंशा को अमल में लाने का एक सार्थक उदाहरण है, जो 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को समर्पित विशेष सत्र के महत्व को और पुख्ता करता है।
इससे पहले, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उनके कैबिनेट सहयोगियों और भाजपा विधायकों ने अपनी बांहों पर काली पट्टियां बांधीं और लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को रोकने में विपक्ष की भूमिका के खिलाफ एक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
मुख्यमंत्री गुप्ता ने इस विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जो महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के समर्थन में दिल्ली सरकार के एकजुट स्टैंड को दिखाता है।
विधानसभा परिसर के अंदर हुए प्रदर्शन ने एक मजबूत राजनीतिक और नैतिक संदेश दिया, जिसे विपक्षी पार्टियों द्वारा महिलाओं को मजबूत बनाने के मकसद से किए गए एक ऐतिहासिक सुधार में रुकावट डालने की जानबूझकर की गई कोशिश बताया गया।
इस मौके पर स्वास्थ्य और परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने पिछले लोकसभा सत्र के दौरान विपक्ष के व्यवहार की कड़ी आलोचना की। मंत्री ने कहा, "हम महिलाओं के सशक्तिकरण के संबंध में विपक्ष द्वारा अपनाए गए रुख की कड़ी निंदा करते हैं। यदि उनकी नीयत सचमुच नेक होती, तो वे बिल को पटरी से उतारने के बहाने बनाने के बजाय, उसका समर्थन करते और उस पर रचनात्मक बहस करते।"
इसके व्यापक प्रभावों पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा, "यह सिर्फ एक बिल की बात नहीं है। यह हमारे देश की करोड़ों महिलाओं की गरिमा और उनके उचित प्रतिनिधित्व का मामला है। विपक्ष के रवैये ने एक बार फिर उनकी महिला-विरोधी मानसिकता को बेनकाब कर दिया है। वे महिला सशक्तिकरण की बातें तो करते हैं, लेकिन जब कुछ करने का समय आता है, तो वे पीछे हट जाते हैं।"
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के विरोधाभास जनता के भरोसे को कमजोर करते हैं। राजनीतिक बयानबाजी सच्ची प्रतिबद्धता की जगह नहीं ले सकती। दिल्ली की जनता जागरूक है और वह साफ-साफ देख सकती है कि किस तरह ध्यान भटकाकर अहम मुद्दों को दरकिनार किया जा रहा है।
--आईएएनएस
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