×

डेनमार्क का सीएचआईपी बना डब्ल्यूएचओ का सहयोगी केंद्र, एचआईवी और टीबी से लड़ाई को मिलेगा बल

 

कोपेनहेगन, 1 मई (आईएएनएस)। विश्व स्वास्थ्य संगठन के यूरोप क्षेत्रीय कार्यालय (डब्ल्यूएचओ/यूरोप) ने डेनमार्क के सेंटर फॉर हेल्थ एंड इन्फेक्शियस डिजीज रिसर्च को नया डब्ल्यूएचओ सहयोगी केंद्र नामित किया है। यह केंद्र एचआईवी, वायरल हेपेटाइटिस, टीबी और यौन संचारित संक्रमणों (एसआईटी) के खिलाफ क्षेत्रीय प्रयासों को मजबूत करेगा।

यह केंद्र 'रिगहॉस्पिटलेट' और यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगेन में स्थित है और डब्ल्यूएचओ/यूरोप तथा सदस्य देशों के साथ मिलकर वैज्ञानिक शोध को व्यवहार में लागू करने, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं को सुदृढ़ करने और क्षेत्रीय स्वास्थ्य लक्ष्यों की दिशा में प्रगति तेज करने का काम करेगा।

यह नामांकन एचआईवी, एच/टीबी सह-संक्रमण और वायरल हेपेटाइटिस पर केंद्रित है, जबकि एसआईटी पर भी कार्य जारी रहेगा। चार वर्षों की अवधि में यह केंद्र स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने, एचआईवी, हेपेटाइटिस और एसटीआई की जांच तक पहुंच का विस्तार करने, कार्यान्वयन व ऑपरेशनल रिसर्च को मजबूत करने और राष्ट्रीय स्तर पर बायोमेडिकल रोकथाम कार्यक्रमों को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

डब्ल्यूएचओ/यूरोप के स्वास्थ्य सुरक्षा और क्षेत्रीय आपात निदेशक इओर पेरेनिट्स ने कहा, “डब्ल्यूएचओ के सहयोगी केंद्र संगठन की तकनीकी क्षमता को बढ़ाते हैं, विशेषज्ञता उपलब्ध कराते हैं और देशों व क्षेत्रों में संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करते हैं।”

एचआईवी एक वायरस है जो सीडी4 कोशिकाओं पर हमला कर प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है। बिना उपचार के यह एड्स में बदल सकता है, जिससे गंभीर संक्रमण हो सकते हैं। हालांकि, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) से संक्रमित व्यक्ति लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

हेपेटाइटिस यकृत (लीवर) की सूजन है, जो वायरल संक्रमण (ए,बी, सी, डी, ई) शराब, विषाक्त पदार्थों या ऑटोइम्यून स्थितियों के कारण हो सकती है। इसके लक्षणों में पीलिया, थकान, पेट दर्द और गहरे रंग का पेशाब शामिल हैं, हालांकि कई मामलों में कोई लक्षण नहीं दिखते।

टीबी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो माइक्रोबेक्टेरियम ट्यूबरक्युलोसिस बैक्टीरिया से होती है और मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। इसके लक्षणों में लगातार खांसी, सीने में दर्द, बुखार, कमजोरी और रात में पसीना आना शामिल है। सही इलाज और एंटीबायोटिक के पूरे कोर्स से टीबी का उपचार संभव है, लेकिन दवा का पूरा पालन जरूरी है ताकि दवा-प्रतिरोधी टीबी न विकसित हो।

--आईएएनएस

केआर/