उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन कर्नाटक के दो दिवसीय दौरे की करेंगे शुरुआत
नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शनिवार से दो दिवसीय कर्नाटक दौरे पर रहेंगे, जहां वे बेंगलुरु में एक धार्मिक कार्यक्रम और नशामुक्त भारत पर आयोजित सम्मेलन में भाग लेंगे।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उपराष्ट्रपति शनिवार को बेंगलुरु में नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा की 517वीं जयंती समारोह में भाग लेंगे।
बयान में कहा गया है कि रविवार को उपराष्ट्रपति बेंगलुरु में राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरजीयूएचएस) के स्थापना दिवस और मादक द्रव्यों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस कार्यक्रम के तहत आयोजित नशा मुक्त भारत सम्मेलन में भाग लेंगे।
इससे पहले गुरुवार को, राधाकृष्णन ने 1975 के आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में आवाज उठाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 'संविधान हत्या दिवस' मनाया। यह ऐसे समय में हो रहा है जब भारत 25 जून, 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल की 51वीं वीं वर्षगांठ मना रहा है।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, "संविधान हत्या दिवस पर, मैं उन सभी बहादुर आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जो भारत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक 1975 में घोषित आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में दृढ़ रहे और हमारे संविधान की भावना की रक्षा की।"
उन्होंने कहा, "आपातकाल उस दौर की एक गंभीर याद दिलाता है जब संवैधानिक मूल्यों की कड़ी परीक्षा हुई थी। नागरिक स्वतंत्रताएं निलंबित कर दी गईं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई और हमारे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए केंद्रीय संस्थाओं को कमजोर कर दिया गया।"
उपराष्ट्रपति ने आगे कहा, "संविधान को मार्गदर्शक मानते हुए, आइए हम इसके आदर्शों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करें और न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित भारत का निर्माण जारी रखें।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में लागू किए गए आपातकाल की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में गुरुवार को बिहार, हरियाणा और देश के कई अन्य हिस्सों में 'संविधान हत्या दिवस' मनाया।
राष्ट्रव्यापी आयोजन के हिस्से के रूप में, पार्टी ने कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है जो आपातकाल के लोकतांत्रिक संस्थानों और नागरिक स्वतंत्रता पर पड़ने वाले प्रभाव को उजागर करेंगे।
--आईएएनएस
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