लश्कर के महिला विंग 'तैय्यबात' का विस्तार, एआई और प्रचार नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के महिला विंग 'तैय्यबात' काफी सक्रिय है। ऐसा कहा जा रहा है कि कट्टरपंथी संगठन में महिलाएं अपनी मर्जी से शामिल हो रही हैं। इसकी स्थापना वर्ष 2025 में हुई थी। वर्ष 2026 की शुरुआत तक इस विंग ने तेजी से विस्तार किया और बड़ी संख्या में महिलाओं की भर्ती की।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां हैरान हैं कि इसमें शामिल अधिकांश महिलाओं ने स्वेच्छा से संगठन की सदस्यता ली है।
भारतीय एजेंसियों के अनुसार, कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने के अलावा यह महिला विंग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रशिक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है। हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा ने भविष्य में प्रचार और आतंकी गतिविधियों के लिए एआई के महत्व पर जोर दिया था। इसके बाद बड़ी संख्या में महिलाओं को एआई का प्रशिक्षण दिया गया। पिछले कुछ महीनों में प्रशिक्षित हुई कई महिलाएं अब नए सदस्यों को भी प्रशिक्षण दे रही हैं।
एक खुफिया ब्यूरो (आईबी) अधिकारी ने कहा कि आने वाले समय में 'तैय्यबात' अपने मूल संगठन लश्कर-ए-तैयबा से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद लश्कर-ए-तैयबा को अपने संगठन को दोबारा खड़ा करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। भर्ती की रफ्तार धीमी हो गई और संगठन के नेतृत्व की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे।
हालांकि, तैय्यबात के मामले में स्थिति अलग है। इसके गठन के बाद से अब तक लगभग 80 प्रतिशत भर्ती स्वैच्छिक रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह बेहद खतरनाक संकेत है। इससे पता चलता है कि संगठन से जुड़ने की महिलाओं में स्वयं इच्छा है और भारत के प्रति उनके मन में गहरी नफरत पैदा की गई है।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि महिला सदस्य लगभग हर विभाग में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। फिलहाल उन्हें आत्मघाती हमलों या सीधे आतंकी हमलों के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जा रहा है, लेकिन कट्टरपंथ फैलाने, भर्ती अभियान चलाने, प्रचार-प्रसार और अब एआई प्रशिक्षण में उनकी भूमिका प्रमुख हो गई है।
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लश्कर-ए-तैयबा को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। भारत की सटीक कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। इनमें लश्कर के दो शीर्ष कमांडर खालिद उर्फ अबू अकाशा और मुदस्सर खडियान खास उर्फ अबू जिंदल भी शामिल थे।
इसके अलावा, इस अभियान में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के नौ आतंकी ठिकाने भी नष्ट कर दिए गए थे।
अधिकारियों के अनुसार, तैय्यबात की शुरुआत के समय लश्कर नेतृत्व ने भर्ती के लिए मारे गए आतंकवादियों की तस्वीरों का इस्तेमाल किया, जिससे महिलाओं में सहानुभूति पैदा की गई। बाद में यह एक श्रृंखला बन गई और अधिकांश भर्ती स्वेच्छा से होने लगी।
भारतीय एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये महिलाएं बड़ी संख्या में युवाओं को लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ने में प्रभावी साबित हो रही हैं। संगठन को युवाओं की सख्त जरूरत है, और यह जिम्मेदारी अब काफी हद तक तैय्यबात संभाल रहा है।
वहीं, जैश-ए-मोहम्मद के महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात (जेयूएम)' की गतिविधियां अभी तैय्यबात की तुलना में काफी सीमित हैं। मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के नेतृत्व में यह संगठन अक्टूबर 2025 में शुरू किया गया था।
अधिकारियों का मानना है कि इसका एक कारण यह भी है कि लश्कर प्रमुख हाफिज सईदअब भी संगठनात्मक रूप से अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय और दिखाई देता है, जबकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश प्रमुख मसूद अजहर लगभग सार्वजनिक गतिविधियों से दूर है। अधिकारियों के अनुसार, उसकी तबीयत खराब है और ऑपरेशन सिंदूर में अपने परिवार के कई सदस्यों की मौत के बाद वह अब तक पूरी तरह उबर नहीं पाया है।
--आईएएनएस
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