संजय राउत की टिप्पणी पर प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं-हिंसा से लोकतंत्र और संविधान को होता है नुकसान
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने मंगलवार को अपनी पार्टी के सांसद संजय राउत के उस बयान की आलोचना की, जिसमें उन्होंने अल्बानिया के सुप्रीम कोर्ट को जलाए जाने का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि यह सुझाव देना कि भारत को ऐसी घटनाओं से सबक लेना चाहिए अनुचित है और इससे देश के लोकतंत्र तथा संविधान को कमजोर करने का काम होता है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि हिंसा से कुछ हासिल नहीं होता और यह देश हित के खिलाफ है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के जरिए अपनी शिकायतें जाहिर करें।
प्रियंका चतुर्वेदी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हमें बस यही सबक सीखना चाहिए कि हमें न्याय प्रणाली और कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए और इस तरह के हिंसक विरोध प्रदर्शनों से बचना चाहिए। हिंसा से कुछ हासिल नहीं होता और यह देश के हित के खिलाफ है। चाहे बांग्लादेश हो, नेपाल हो, अल्बानिया हो या फ्रांस - ऐसी घटनाएं छात्रों के विरोध प्रदर्शन से शुरू होती हैं, जिसके बाद गलत इरादे वाले लोग इसमें शामिल हो जाते हैं और फिर ऐसी घटनाएं घटती हैं।"
प्रियंका चतुर्वेदी ने राजनीतिक और चुनावी मुद्दों पर अपनी पार्टी द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक चिंताओं को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीकों से ही उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह लड़ाई हमारे देश के संविधान और लोकतंत्र के लिए है। जिस तरह हमने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के जरिए धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाया, उसी तरह अब हम यह सुनिश्चित करने के लिए लड़ रहे हैं कि चुनाव आयोग की गरिमा बनी रहे। साथ ही, हम ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी अपनी बात रख रहे हैं।"
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "इसके बावजूद, यह कहना कि हमें ऐसी घटनाओं से सबक लेना चाहिए या यह कि हिंसा हो सकती है, गलत है। इससे हमारे लोकतंत्र और संविधान को ही नुकसान पहुंचता है।"
उनके ये बयान उस बहस के बीच आए हैं, जो अल्बानिया में हुई अशांति पर राउत की टिप्पणी के बाद शुरू हुई थी। राउत ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, "अल्बानिया के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया है। लोग इसलिए गुस्से में थे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद कर रहा था। प्रदर्शन कर रही जनता ने संसद, सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों के घरों पर भी हमला किया है। सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए, खासकर भारत को।"
--आईएएनएस
ओपी/पीएम