बांग्लादेश में चुनाव के बाद अल्पसंख्यकों पर बढ़े हमले, रिपोर्ट में जताई गई चिंता
ढाका, 31 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में हालिया चुनावों के बाद धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में वृद्धि हुई है। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों और ईसाई समुदाय से जुड़े समूहों की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि देश में ईसाइयों और हिंदुओं पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, खासकर उन इलाकों में जहां जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव अधिक है।
उत्पीड़ित ईसाइयों के समर्थन के लिए काम करने वाले संगठन ओपन डोर्स यूके और आयरलैंडने कहा है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पहले से बढ़ रही थी, लेकिन चुनाव के बाद इसमें और तेजी आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद फरवरी में हुए पहले चुनाव के पश्चात ईसाई और हिंदू समुदाय के लोगों ने हमलों में वृद्धि की शिकायत की है। विशेष रूप से इस्लाम से धर्म परिवर्तन कर ईसाई बने लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।
बताया गया है कि चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को जीत मिली, जबकि जमात-ए-इस्लामी को भी करीब एक-तिहाई मत प्राप्त हुए।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ढाका स्थित सेंट यूजीन डी माजेनोड चर्च में एक कैथोलिक पादरी से पासपोर्ट और नकदी लूट ली गई तथा उनके साथ मारपीट की गई। समुदाय के नेताओं का कहना है कि जमात-ए-इस्लामी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में हिंसा की घटनाएं अधिक देखने को मिली हैं।
फरवरी के चुनावों के बाद से अब तक 50 से अधिक घटनाएं दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। मार्च में हिंदू और ईसाई नेताओं ने ढाका में प्रदर्शन कर बीएनपी सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी।
इस बीच, फ्रांस स्थित मानवाधिकार संगठन फ्रांस में जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश (जेएमबीएफ) ने भी बांग्लादेश में जनवरी से अप्रैल के बीच धार्मिक एवं जातीय अल्पसंख्यकों और आदिवासी समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है।
जेएमबीएफ ने बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों के लिए मानवाधिकार कांग्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश के सभी आठ प्रशासनिक प्रभागों के 62 जिलों में कुल 505 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें हत्या, संदिग्ध मौतें, शारीरिक हमले, अपहरण, यौन हिंसा, मंदिरों और धार्मिक संस्थानों पर हमले, भूमि कब्जा, आगजनी, लूटपाट, धमकी और ईशनिंदा से जुड़े उत्पीड़न के मामले शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 43 जिलों में मंदिरों और धार्मिक मूर्तियों पर हमलों की 95 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 23 जिलों में बलात्कार और सामूहिक दुष्कर्म सहित यौन हिंसा के 28 मामले सामने आए। इसके अलावा छह जिलों में ईशनिंदा से जुड़े छह मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
जेएमबीएफ के संस्थापक और अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने कहा कि ये घटनाएं बांग्लादेश में बढ़ती असहिष्णुता, भेदभाव और संस्थागत विफलता को दर्शाती हैं, जो मानवाधिकारों, समानता, धर्मनिरपेक्षता और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती है।
संगठन ने बांग्लादेश सरकार से सभी घटनाओं की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक आयोग गठित करने, दोषियों को जवाबदेह ठहराने तथा पीड़ितों को सुरक्षा, मुआवजा और पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अल्पसंख्यक संरक्षण कानून तथा स्वतंत्र अल्पसंख्यक आयोग के गठन की भी अपील की गई है।
--आईएएनएस
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