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केरल में शराब नीति पर बढ़ा विवाद, कांग्रेस नेताओं की आपत्तियों से सतीशन सरकार पर दबाव

 

तिरुवनंतपुरम, 22 जून (आईएएनएस)। कम अल्कोहल वाली शराब के उत्पादन को बढ़ावा देने और राज्य के तटवर्ती इलाकों में माइनिंग गतिविधियों की संभावना तलाशने को लेकर विवाद बढ़ गया है। यह विवाद वीडी सतीशन सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है, क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इन कदमों पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस के सीनियर नेता वीएम सुधीरन के इस बहस में शामिल होने के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है। इससे पिछली कांग्रेस सरकार के समय शराब और रेत खनन नीतियों पर उनके कड़े रुख की यादें ताजा हो गई हैं।

शराब और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाने के लिए पहचाने जाने वाले सुधीरन एक बार फिर पार्टी के भीतर एक संवेदनशील राजनीतिक मामले में शामिल हो गए हैं।

उनका यह कदम मुख्यमंत्री वीडी सतीशन द्वारा बजट पेश किए जाने के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें कम अल्कोहल वाली शराब के उत्पादन को बढ़ावा देने और तटीय इलाकों में खनन गतिविधियों की संभावना पर विचार करने की घोषणा की गई थी।

इन घटनाक्रमों से कांग्रेस के भीतर चिंता बढ़ गई है कि ये प्रस्ताव पार्टी को शराबबंदी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उसके पारंपरिक रुख के खिलाफ खड़ा कर सकते हैं।

इस ताजा विवाद से ओमन चांडी सरकार (2011-16) के कार्यकाल की यादें भी ताजा हो गई हैं, जब तत्कालीन राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सुधीरन ने शराब नीति का कड़ा विरोध किया था।

उनके लगातार अभियान ने सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाया, जिसके चलते आखिरकार बड़ी संख्या में बार बंद करने का फैसला लिया गया।

जब चांडी सरकार का कार्यकाल पूरा हुआ, तो राज्य में चालू बार की संख्या तीन दर्जन से भी कम रह गई थी।

हालांकि, अगले दशक में शराब के मामले में हालात काफी बदल गए और एलडीएफ सरकार के दो कार्यकालों के दौरान बार की संख्या बढ़कर लगभग 900 हो गई।

पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल के दौरान सुधीरन ने बार-बार मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शराब नीति पर पुनर्विचार करने और कड़े नियंत्रण लागू करने की मांग की थी।

अब, जब कांग्रेस खुद सत्ता में है तो उनका यह कदम सतीशन सरकार के लिए एक नई चुनौती बन सकता है, क्योंकि सरकार राजस्व और पार्टी की सामाजिक प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि किसी को भी कांग्रेस की शराब-विरोधी नीति से अलग हटने का अधिकार नहीं है और जोर दिया कि संवेदनशील नीतिगत फैसलों के लिए पार्टी के भीतर व्यापक चर्चा जरूरी है।

विपक्षी दलों ने भी इस विवाद को लपक लिया है और आरोप लगाया है कि इस कदम से शराब कंपनियों को फायदा होगा।

वहीं, सरकार का तर्क है कि इस प्रस्ताव का मकसद आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और राजस्व में सुधार करना है।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, आलाकमान और विपक्ष की पैनी नजर के बीच, शराब नीति पर यह बहस सतीसन के लिए पहली बड़ी राजनीतिक चुनौती बनकर उभरी है।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी