'वंदे मातरम्' विवाद पर गुजरात विधानसभा में बढ़ी हलचल, दूसरे दिन उठ सकता है मामला
गांधीनगर, 9 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात विधानसभा में 'वंदे मातरम्' को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा सकता है। मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला के राष्ट्रीय गीत के दौरान बैठ जाने के मामले को लेकर भाजपा के मंत्रियों और विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी से मुलाकात कर शिकायत सौंप दी।
विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने पुष्टि की कि उन्हें मंत्रियों की ओर से यह प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ है। सूत्रों के अनुसार, वह गुरुवार को इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट कर सकते हैं और आवश्यक निर्देश जारी कर सकते हैं। ऐसे में तीन दिवसीय मानसून सत्र के दूसरे दिन यह मुद्दा प्रमुखता से उठ सकता है।
विधानसभा अध्यक्ष से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, मंत्री कनु देसाई, ऋषिकेश पटेल, प्रवीण माली, विधायक महेश कसवाला तथा भाजपा महासचिव और विधायक अनिरुद्धसिंह जडेजा शामिल थे।
सरकार के प्रवक्ता जीतू वघाणी ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले 'वंदे मातरम्' का गायन कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि यह विधानसभा की लंबे समय से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, "विधानसभा अपनी परंपराओं, व्यवस्था और नियमों के अनुसार चलती है। वंदे मातरम् का गायन विधानसभा गठन के समय से ही होता आ रहा है। यह परंपरा भाजपा सरकार ने शुरू नहीं की है।"
वघाणी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा की परंपराओं, नियमों और अध्यक्ष के अधिकारों पर चर्चा की है, खासकर उन मामलों में जहां स्थापित प्रक्रियाओं के उल्लंघन का आरोप हो।
उन्होंने यह भी कहा कि 'वंदे मातरम्' को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार यह देश के लिए आस्था, श्रद्धा और राष्ट्रवाद का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि इमरान खेड़ावाला का रुख केवल व्यक्तिगत नहीं माना जा सकता, क्योंकि वे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं और उन्हें विधानसभा के नियमों एवं परंपराओं का पालन करना चाहिए।
विवाद की शुरुआत मानसून सत्र के पहले दिन हुई, जब इमरान खेड़ावाला राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान बैठ गए थे।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ावाला ने कहा कि उन्होंने पारंपरिक रूप से गाए जाने वाले हिस्से के दौरान खड़े होकर सम्मान व्यक्त किया था, लेकिन बाद में गाए गए अतिरिक्त हिस्से के दौरान बैठ गए। उन्होंने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत वैचारिक रुख था और उन्होंने पारंपरिक गायन में पूरा सम्मान दिखाया।
जीतू वघाणी ने इसे व्यक्तिगत रुख मानने से इनकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार 'वंदे मातरम्' के किसी भी कथित अपमान को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस से भी अपना स्पष्ट रुख बताने की मांग की।
अब सभी की नजर गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष की संभावित टिप्पणी और फैसले पर टिकी हुई है, जिससे इस विवाद की आगे की दिशा तय हो सकती है।
--आईएएनएस
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