रिपोर्ट: टीकाकरण में चूक और प्रशासनिक विफलताओं के कारण बांग्लादेश में फैला खसरे का प्रकोप
ओटावा, 7 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे के मामलों में तेज बढ़ोतरी के बीच एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वकालत समूह ने 2026 के इस प्रकोप को हाल के इतिहास में देश के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया है। समूह ने कहा कि यह बीमारी टीकाकरण से रोकी जा सकती थी।
कनाडा स्थित 'ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस जीसीडीजी' ने अपनी ताजा रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रैजेडी: बांग्लादेश का 2026 खसरा प्रकोप' में कहा कि यह प्रकोप जनता को अचानक लगा हो, लेकिन "महामारी विज्ञान के नजरिए" से यह अप्रत्याशित नहीं था।
रिपोर्ट में कहा गया कि यह संकट 2024-2025 में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार के दौरान टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई बाधाओं, नियमित टीकाकरण में चूक, तय पूरक टीकाकरण अभियानों के रद्द होने, टीका खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाले समूहों की समय पर पहचान न होने के कारण हुआ।
जीसीडीजी के अनुसार बांग्लादेश लंबे समय से यूनिसेफ की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला के जरिए विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुमोदित टीके खरीदता था। लेकिन अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था को खुली निविदा खरीद प्रक्रिया से बदल दिया। रिपोर्ट में यूनिसेफ का हवाला देते हुए कहा गया कि एजेंसी ने 2024 से 2026 के बीच पांच से छह औपचारिक पत्रों और करीब 10 बैठकों में अंतरिम सरकार को टीकों की संभावित कमी की चेतावनी दी थी।
रिपोर्ट में कहा गया, "बांग्लादेश के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के लिए हर साल लगभग 70 मिलियन खुराक विभिन्न टीकों की जरूरत होती है, लेकिन अगस्त से नवंबर 2025 के बीच यूनिसेफ की अग्रिम फंडिंग से केवल 17.8 मिलियन खुराक ही खरीदी जा सकीं। यूनिसेफ ने कहा कि फंड आवंटित होने के बावजूद खरीद की विधि को लेकर अनिर्णय और लंबी खुली निविदा प्रक्रिया के कारण समय पर टीके नहीं खरीदे जा सके।"
बांग्लादेशी दैनिक समकाल में प्रकाशित विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम ईपीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए जीसीडीजी ने बताया कि 2025 में खसरे के टीकाकरण का कवरेज घटकर 56.2 प्रतिशत रह गया, जो 2017 से 2025 के बीच का सबसे निचला स्तर है।
इसमें कहा गया कि डब्ल्यूएचओ ने बाद में 2024-2025 के दौरान बांग्लादेश में खसरा-रूबेला एमआर टीके का देशव्यापी स्टॉक खत्म होना और नियमित टीकाकरण का अभाव बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट और 2026 के प्रकोप की मुख्य वजह बताया।
जीसीडीजी ने कहा, "कुल मिलाकर खसरे का देशव्यापी प्रसार प्रशासनिक और स्वास्थ्य प्रणाली की विफलताओं का नतीजा है। इसमें अंतरिम सरकार के तहत पैदा हुआ कार्यक्रम संबंधी खालीपन, टीका खरीद, परिवहन और आपूर्ति में बाधा, टीकों का स्टॉक खत्म होना, ईपीआई सत्र रद्द होना, एमआर1 और एमआर2 कवरेज में गिरावट, तय टीकाकरण छूटने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या, पूरक टीकाकरण कार्यक्रमों का अभाव और वर्तमान सरकार की अपर्याप्त एवं अक्षम चिकित्सा प्रतिक्रिया शामिल हैं।"
संगठन ने आगे कहा कि इस साल की शुरुआत में सत्ता में आई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी बीएनपी की सरकार "ज्ञात और मापने योग्य जोखिमों" पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में विफल रही।
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल की शुरुआत में अस्पतालों में भीड़, आइसोलेशन और रेफरल की खामियों की चेतावनी के बावजूद उपकरणों की खरीद, अस्थायी आइसोलेशन इकाइयां स्थापित करना, मानव संसाधन तैनात करना और मानक उपचार प्रोटोकॉल बनाना मई के अंत तक चलता रहा।
पारदर्शिता की कमी की आलोचना करते हुए जीसीडीजी ने खसरे के प्रकोप के दौरान वर्तमान सरकार की चिकित्सा प्रतिक्रिया में "सूचना की अपारदर्शिता" को एक अलग और गंभीर विफलता बताया।
--आईएएनएस
डीएससी