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अमेरिकी सीनेटरों ने सऊदी परमाणु समझौते को रोकने के लिए पेश किया प्रस्ताव

 

वाशिंगटन, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के दो डेमोक्रेट सीनेटरों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सऊदी अरब के साथ असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को रोकने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है।

सीनेटरों ने चेतावनी दी कि इस डील में मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय नहीं हैं।

ओरेगन के सीनेटर जेफ मर्कले और मैसाचुसेट्स के सीनेटर एडवर्ड मार्के ने असहमति का संयुक्त प्रस्ताव पेश किया, जिससे 29 नवंबर के बाद सीनेट में वोटिंग का रास्ता खुलेगा, इससे पहले कि प्रस्तावित समझौता लागू हो। यह कदम रियाद के साथ प्रशासन की परमाणु कूटनीति के लिए एक नई चुनौती है।

संघीय कानून के तहत, कांग्रेस के पास समझौते की समीक्षा के लिए 90 दिन का समय है। जब तक कांग्रेस इसे रोकने का प्रस्ताव नहीं अपनाती, तब तक समीक्षा अवधि के बाद समझौता लागू हो सकता है।

सीनेट विदेश संबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य मर्कले ने कहा कि सऊदी अरब को असैन्य परमाणु तकनीक हस्तांतरित करने से पहले अमेरिका को मजबूत सुरक्षा उपायों पर जोर देना चाहिए।

मर्कले ने कहा, "सऊदी अरब को अमेरिका की असैन्य परमाणु ऊर्जा तकनीक तक पहुंच देना, बिना इस बात की पुख्ता गारंटी के कि यह परमाणु बम की नींव नहीं बनेगी, अस्वीकार्य है। हम इतने बड़े फैसले में आंख बंद करके नहीं चल सकते।"

एडवर्ड मार्के ने इससे भी आगे जाकर चेतावनी दी कि यह प्रस्तावित समझौता पहले से ही अस्थिर क्षेत्र को और अस्थिर कर सकता है। उन्होंने कहा, "अमेरिका-सऊदी परमाणु डील मेगावाट के बारे में नहीं, बल्कि मेगाटन के बारे में है।"

उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि यह समझौता स्थापित अप्रसार मानकों से कम है, खासकर सबसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण की आवश्यकता के बिना यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देकर।

एडवर्ड मार्के ने कहा, "यह डील मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों होड़ की शुरुआत है। कांग्रेस को इसे खारिज करना चाहिए।"

सीनेटरों का तर्क है कि समझौता दो जरूरी सुरक्षा उपायों को पूरा नहीं करता। पहला है असैन्य परमाणु सहयोग के लिए तथाकथित गोल्ड स्टैंडर्ड, जिसके तहत प्राप्तकर्ता देश यूरेनियम को समृद्ध नहीं करने या खर्च किए गए परमाणु ईंधन को पुन: संसाधित नहीं करने के लिए प्रतिबद्ध होता है।

दूसरा है अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अतिरिक्त प्रोटोकॉल का पालन, जो निरीक्षकों को अघोषित परमाणु गतिविधियों का पता लगाने में मदद के लिए व्यापक पहुंच प्रदान करता है।

सीनेटरों के अनुसार, इन शर्तों के अभाव में अन्य क्षेत्रीय शक्तियों को भी इसी तरह की रियायतें मांगने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। उन्होंने विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात का हवाला दिया, जिसके वाशिंगटन के साथ परमाणु सहयोग समझौते में संवेदनशील परमाणु गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध शामिल थे।

उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अगर सऊदी अरब को ऐसी क्षमताओं की अनुमति दी गई जो तेहरान को नहीं दी गई, तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर भविष्य के प्रतिबंधों का विरोध कर सकता है।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस