अमेरिका और इटली ने अहम खनिजों पर सहयोग बढ़ाने के लिए किया समझौता
वॉशिंगटन, 22 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिका और इटली ने क्रिटिकल मिनरल्स यानी बेहद अहम खनिजों को लेकर आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें इन खनिजों की रीसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल के लिए उन्हें हासिल करने पर खास ध्यान दिया जाएगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और इटली के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौते के तहत एक साझा वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा, जिसका काम अहम खनिजों की रीसाइक्लिंग और उन्हें दोबारा हासिल करने के तरीकों पर दोनों देशों के बीच ठोस सहयोग को आगे बढ़ाना होगा।
रुबियो और ताजानी ने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के दूसरे मौकों पर भी चर्चा की।
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, बातचीत में सप्लाई चेन के लिए अलग-अलग स्रोत तैयार करने और रणनीतिक रूप से अहम मानी जाने वाली इंडस्ट्री को विरोधी देशों या उनसे जुड़ी संस्थाओं द्वारा खरीद या नियंत्रण में लिए जाने से बचाने की कोशिशों पर भी चर्चा हुई।
रीसाइक्लिंग पर जोर दिए जाने से संकेत मिलता है कि अमेरिका और इटली सिर्फ नई खदानों से खनिज निकालकर ही अपनी सप्लाई नहीं बढ़ाना चाहते। वे इस्तेमाल हो चुके सामान, औद्योगिक कचरे और दूसरे मौजूदा स्रोतों से कीमती खनिजों को निकालकर दोबारा इस्तेमाल करने पर भी ध्यान देना चाहते हैं।
ऐसी कोशिशों से नए खनिजों के खनन पर निर्भरता कम हो सकती है। साथ ही देशों को अपने महत्वपूर्ण संसाधनों को अपनी ही मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्था में बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
दोनों देशों का यह सहयोग बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा सिस्टम, बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे और दूसरी आधुनिक टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल होने वाले खनिजों को शामिल कर सकता है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने यह विस्तार से नहीं बताया कि इस समझौते में किन-किन क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
साझा वर्किंग ग्रुप के जरिए दोनों देशों के अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ उन क्षेत्रों की पहचान कर सकेंगे, जहां मिलकर काम किया जा सकता है।
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इस वर्किंग ग्रुप का मुख्य ध्यान सिर्फ बड़े स्तर की राजनीतिक बातचीत के बजाय जमीन पर ठोस काम करने पर होगा।
खनिजों को दोबारा हासिल करने की कोशिशों के तहत ऐसे सामान से खनिजों को इकट्ठा करने, अलग करने और फिर से इस्तेमाल करने की बेहतर व्यवस्था बनाई जा सकती है, जो अपनी इस्तेमाल की अवधि पूरी कर चुके हैं।
सिर्फ रीसाइक्लिंग के जरिए नई खदानों से होने वाले खनिज उत्पादन की जरूरत पूरी तरह खत्म नहीं की जा सकती। लेकिन इससे घरेलू या क्षेत्रीय स्तर पर खनिजों का एक अतिरिक्त स्रोत मिल सकता है और विदेशों में कुछ ही जगहों पर मौजूद मिनरल प्रोसेसिंग नेटवर्क पर निर्भरता कम की जा सकती है।
आमतौर पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) उन क्षेत्रों को तय करता है, जिनमें दो सरकारें मिलकर काम करना चाहती हैं। अमेरिका और इटली के इस समझौते का कितना असर होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नया वर्किंग ग्रुप आगे चलकर किस तरह के प्रोजेक्ट, नीतियां और निवेश लेकर आता है।
क्रिटिकल मिनरल्स किसी देश की अर्थव्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी होते हैं और जिनकी सप्लाई में रुकावट आने का खतरा हो सकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों, रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा टेक्नोलॉजी के तेजी से बढ़ने के साथ इन खनिजों की मांग भी बढ़ी है।
अमेरिका और इटली के इस समझौते पर भारत की भी नजर रहने की उम्मीद है, क्योंकि भारत भी अहम खनिजों को लेकर दूसरे देशों के साथ अपनी साझेदारी बढ़ाने और देश में ही इनकी प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।
--आईएएनएस
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