ग्रीन कार्ड सिस्टम को बदल सकता है यूएस का नया बिल, भारतीय प्रोफेशनल्स पर होगा बड़ा असर
वॉशिंगटन, 25 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिका के एक रिपब्लिकन सीनेटर ने ऐसा बिल पेश किया है, जो नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर सकता है। अगर यह बिल कानून बनता है, तो अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड का लंबे समय से इंतजार कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
अलबामा के सीनेटर टॉमी टबरविले ने 'अमेरिकन्स फर्स्ट इमिग्रेशन एक्ट' नामक बिल पेश किया है। इसमें नौकरी के आधार पर ग्रीन कार्ड देने की मौजूदा कैटेगरी को हटाकर पॉइंट्स पर आधारित सिस्टम लाने का प्रस्ताव है।
बिल के पूरे टेक्स्ट के मुताबिक, नई व्यवस्था लागू होने पर रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए पहले से लंबित कई याचिकाएं भी अमान्य हो सकती हैं।
इन याचिकाओं के आधार पर ग्रीन कार्ड के लिए अमेरिका के अंदर से स्टेटस बदलने या विदेश से इमिग्रेंट वीजा लेने के आवेदन 'खारिज, नामंजूर या अमान्य' किए जा सकेंगे।
जिन लोगों की याचिकाएं नई व्यवस्था लागू होने की तारीख से पहले ही मंजूर हो चुकी होंगी, उन्हें मौजूदा कैटेगरी के तहत तब तक वीजा मिल सकेगा, जब तक उस वित्त वर्ष के लिए तय सालाना वीजा कोटा खत्म नहीं हो जाता। इसके बाद उस कैटेगरी के तहत कोई और वीजा जारी नहीं किया जाएगा।
इस प्रावधान का खास तौर पर भारतीय आवेदकों पर बड़ा असर पड़ सकता है क्योंकि बहुत से भारतीयों की रोजगार आधारित याचिकाएं मंजूर हो चुकी हैं लेकिन वे लंबे ग्रीन कार्ड बैकलॉग की वजह से अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
टबरविले ने कहा कि हमारी मौजूदा इमिग्रेशन व्यवस्था इस बात का सही तरीके से आकलन नहीं करती कि हम किस तरह के लोगों को देश में आने दे रहे हैं। यह लगभग सभी के लिए खुली व्यवस्था बन गई है। अमेरिका आना एक विशेष अवसर है और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे देश में आने वाला हर व्यक्ति हमारे कानूनों का पालन करने और हमारे समाज में योगदान देने के लिए तैयार हो।
इस बिल के तहत दुनिया भर के लिए हर साल 1,92,000 पॉइंट्स-बेस्ड इमिग्रेंट वीजा देने की व्यवस्था होगी। हालांकि, यह संख्या पिछले वित्त वर्ष में ऐसे कुछ प्रवासियों की संख्या के आधार पर कम की जा सकती है, जिन्हें हिरासत में नहीं लिया गया था या जिन्हें अनिवार्य हिरासत से छोड़ दिया गया था।
आवेदक के पास अमेरिका में असली और पक्की नौकरी का ऑफर होना जरूरी होगा। इसके साथ उसे कम से कम 16 पॉइंट्स हासिल करने होंगे। आवेदक की उम्र 18 से 51 साल के बीच होनी चाहिए। उसे अंग्रेजी भाषा की परीक्षा में भी तय स्तर, यानी पांचवें डेसाइल या उससे ऊपर, का स्कोर हासिल करना होगा। सैलरी, शिक्षा, इंग्लिश में दक्षता, मिलिट्री सर्विस और असाधारण उपलब्धि के लिए पॉइंट्स दिए जाएंगे। यह सिस्टम सबसे ज़्यादा स्कोर वाले आवेदकों को प्राथमिकता देगा।
जिन आवेदकों के पास नियमों के मुताबिक योग्य अमेरिकी डिग्री नहीं होगी, उन्हें आम तौर पर ऐसी नौकरी का ऑफर चाहिए होगा, जिसमें सैलरी उस राज्य की मीडियन यानी बीच के स्तर की सामान्य सैलरी से कम से कम 200 प्रतिशत हो। वहीं, योग्य अमेरिकी डिग्री रखने वाले लोगों के लिए नौकरी का ऑफर उस राज्य की मीडियन सैलरी का कम से कम 150 प्रतिशत होना जरूरी होगा।
बिल के मुताबिक, कंपनियों को किसी विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से पहले अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती की कोशिश करनी होगी। अगर कोई अमेरिकी कर्मचारी उस नौकरी के लिए विदेशी उम्मीदवार के बराबर या उससे ज्यादा योग्य है, तो कंपनी को पहले उस अमेरिकी कर्मचारी को नौकरी ऑफर करनी होगी।
इसके अलावा जरूरी दस्तावेज दाखिल करने से 90 दिन पहले से कंपनियां उसी तरह की नौकरी कर रहे कर्मचारियों को निकाल नहीं सकेंगी। पॉइंट्स सिस्टम के जरिए मिलने वाला ग्रीन कार्ड शुरुआत में दो साल के लिए शर्तों के साथ दिया जाएगा।
अगर मुख्य आवेदक को 'मीन्स-टेस्टेड पब्लिक बेनिफिट' (आय-आधारित सरकारी मदद) मिलती है, उसे कुछ खास अपराधों के लिए दोषी ठहराया जाता है, या वह ज़रूरी नौकरी बनाए रखने में नाकाम रहता है, तो मुख्य आवेदक, जीवनसाथी और बच्चों का स्टेटस खत्म किया जा सकता है।
बिल में 'डाइवर्सिटी वीजा लॉटरी' को खत्म करने का प्रस्ताव भी है। परिवार के आधार पर अमेरिका में स्थायी निवास की व्यवस्था को भी सीमित करके मुख्य रूप से पति या पत्नी और नाबालिग बच्चों तक रखने का प्रस्ताव है। इसके तहत अमेरिकी नागरिकों के माता-पिता, भाई-बहनों और वयस्क बच्चों के लिए मौजूदा ग्रीन कार्ड रास्ते भी खत्म हो जाएंगे।
बिल में यह भी कहा गया है कि जो प्रवासी अमेरिका के स्थायी निवासी नहीं हैं, उन्हें अमेरिकी कॉलेजों में कम से कम उतनी ट्यूशन फीस और दूसरे शुल्क देने होंगे, जितने उस राज्य के बाहर से आने वाले अमेरिकी छात्रों से लिए जाते हैं। इस नियम का उल्लंघन करने वाले कॉलेज या संस्थान पांच साल तक अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दाखिला देने की मंजूरी खो सकते हैं।
--आईएएनएस
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