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अव्यवस्थित और बिना योजना के विकसित हो रही ढाका: रिपोर्ट

 

ढाका, 10 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश की राजधानी ढाका का विकास एक कमजोर आर्थिक भूगोल के विस्तार को दर्शाता है, लेकिन यह शहर अब तक एक आधुनिक और रहने योग्य महानगर के रूप में उभर नहीं पाया है। बीते कुछ दशकों में आकार और आबादी के लिहाज से तेजी से फैलने के बावजूद ढाका आज भी अव्यवस्थित, बिना ठोस योजना और बदहाल प्रबंधन का शिकार है। यह बात शनिवार को आई एक रिपोर्ट में कही गई।

बांग्लादेश के प्रमुख बंगाली दैनिक प्रथम आलो में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, “यातायात लोगों के लिए लगातार पीड़ा का कारण बना हुआ है। आवास व्यवस्था में किसी ठोस योजना के संकेत नहीं मिलते। बिजली, पानी और गैस जैसी बुनियादी सेवाओं की गुणवत्ता बेहद खराब है। शहर में हरित क्षेत्र और फुटपाथों का अभाव है। शोर और वायु प्रदूषण हर जगह फैला हुआ है। समस्याओं की सूची लंबी है और पूरे शहर में प्रबंधन का गंभीर संकट व्याप्त है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि ढाका धीरे-धीरे झुग्गी-झोपड़ियों का शहर बनता जा रहा है। अनौपचारिक बस्तियां राजधानी भर में फैल रही हैं, जो अक्सर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयों और आग लगने की घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहती हैं।

हालांकि शहरीकरण ने शहर की जनसांख्यिकी को बदल दिया है, लेकिन इस बात पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया कि लोग कैसे रहते हैं, कैसे काम करते हैं, सामाजिक रिश्ते कैसे विकसित होते हैं और नई बस्तियां किस तरह आकार लेती हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है, “बाल विवाह की दर ऊंची है, बच्चों में कुपोषण व्यापक है, शिक्षा का स्तर कम है, अपराध दर अधिक है और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है।”

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि जुलाई 2025 में ब्रिटिश मीडिया समूह द इकोनॉमिस्ट की शोध इकाई, इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (ईआईयू) ने 173 शहरों का वैश्विक सर्वेक्षण जारी किया था, जिसमें स्थिरता, स्वास्थ्य, संस्कृति और पर्यावरण, शिक्षा तथा बुनियादी ढांचे जैसे मानकों पर शहरों का आकलन किया गया। इस ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स में ढाका को 171वां स्थान मिला।

इसके अलावा, वैश्विक वायु प्रदूषण की दैनिक रैंकिंग में भी ढाका अक्सर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहता है। रिपोर्ट के अनुसार, “ढाका महानगर का नाम लेते ही एक घनी, भीड़भाड़ वाली और भयावह शहर की तस्वीर सामने आती है। यातायात जाम ने शहर को सुस्त बना दिया है और यहां के लोगों की जीवन गति को काफी धीमा कर दिया है।”

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अपर्याप्त ड्रेनेज व्यवस्था और कमजोर प्रबंधन के कारण राजधानी के निवासी हर समय बाढ़ के खतरे में रहते हैं, जिससे शहर भर में कचरे का अंबार लग जाता है।

रिपोर्ट में बताया गया, “साल भर निर्माण कार्य चलते रहते हैं, जिससे शहर धूल से भरा रहता है। ढाका का माहौल नीरस और उदास दिखाई देता है। इसके साथ ही गरीबी, सामाजिक असमानता, दबाव में स्वास्थ्य व्यवस्था और कमजोर शासन व्यवस्था ने हालात को और गंभीर बना दिया है।”

--आईएएनएस

डीएससी