कर्नाटक: एसआईआर प्रक्रिया में कथित ढिलाई पर शोभा करंदलाजे ने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग
बेंगलुरु, 3 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर शुक्रवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
करंदलाजे ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि राज्य में निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित घर-घर जाकर सत्यापन (डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन) की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन करने के बजाय कई स्थानों पर सामुदायिक भवनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर शिविर लगाकर गणना प्रपत्र (एन्यूमरेशन फॉर्म) वितरित किए जा रहे हैं।
उन्होंने निर्वाचन आयोग से मांग की कि पूरे कर्नाटक में चल रहे एसआईआर अभियान की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा किए जाने वाले अनिवार्य घर-घर सत्यापन की प्रक्रिया को कहीं शिविर आधारित सत्यापन से प्रतिस्थापित या कमजोर तो नहीं किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने आयोग से यह भी अनुरोध किया कि यह जांच की जाए कि बीएलओ को आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से अपने दायित्व निभाने की अनुमति दी जा रही है या नहीं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी अयोग्य व्यक्ति, अवैध प्रवासी या गैर-नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।
उन्होंने आयोग से राज्य के सभी निर्वाचन अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करने के निर्देश देने तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करने की भी मांग की, ताकि मतदाता सूची पुनरीक्षण की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।
करंदलाजे ने कहा कि लोकतांत्रिक चुनावों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए शुद्ध और सटीक मतदाता सूची अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आग्रह किया कि कर्नाटक में एसआईआर की प्रक्रिया संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही संचालित कराई जाए।
अपने पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यभर में जिस तरीके से एसआईआर अभियान चलाया जा रहा है, उसे लेकर जनप्रतिनिधियों, बीएलओ, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों में व्यापक चिंता व्याप्त है। उनके अनुसार, कई स्थानों पर घर-घर सत्यापन के बजाय सामुदायिक केंद्रों में शिविर लगाकर प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिससे विशेष गहन पुनरीक्षण का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य प्रत्येक मतदाता का उसके सामान्य निवास स्थान पर जाकर भौतिक सत्यापन करना है। यदि इस प्रक्रिया से किसी प्रकार का विचलन होता है तो मतदाता सूची पुनरीक्षण की विश्वसनीयता और उसमें निहित सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी दावा किया कि उन्हें ऐसी शिकायतें मिली हैं कि बीएलओ को इस प्रक्रिया में विश्वास में नहीं लिया जा रहा है और उन्हें निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार अपने वैधानिक दायित्व निभाने का अवसर नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राजनीतिक लाभ के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर निर्धारित एसआईआर प्रक्रिया को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रभावी घर-घर सत्यापन नहीं होने से अवैध प्रवासियों तथा अन्य अयोग्य व्यक्तियों के मतदाता सूची में शामिल होने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, जिससे मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास प्रभावित होगा।
करंदलाजे ने संविधान के अनुच्छेद 324 का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि मतदाता सूची की तैयारी और पुनरीक्षण की प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और कार्यपालिका के प्रभाव से मुक्त रहे। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया से किसी भी बड़े स्तर पर विचलन की तत्काल जांच और सुधारात्मक कार्रवाई आवश्यक है।
--आईएएनएस
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