कुमारस्वामी ने केपीएससी की सभी परीक्षाएं टालने की मांग की, कांग्रेस सरकार को दी 'बदले की राजनीति' छोड़ने की नसीहत
बेंगलुरु, 7 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शनिवार को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की ओर से आयोजित की जा रही सभी भर्ती परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आयोग में पूरी तरह सुधार होने और उसकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित होने के बाद ही परीक्षाएं आयोजित की जानी चाहिए।
कुमारस्वामी ने जेडीएस के केंद्रीय कार्यालय जेपी भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान विशेष रूप से 319 राजपत्रित परिवीक्षाधीन अधिकारियों (केएएस) के पदों पर भर्ती के लिए 15 नवंबर को होने वाली परीक्षा स्थगित करने की मांग की। इस दौरान दीपावली के अवसर पर राज्य की कांग्रेस सरकार को संदेश देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार को नफरत, जाति और बदले की राजनीति छोड़कर कर्नाटक के विकास के लिए ईमानदारी से काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार कोई अच्छी पहल करती है तो वह उसका समर्थन करेंगे, लेकिन आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रही है।
कुमारस्वामी ने कहा कि पिछले तीन से चार वर्षों में केपीएससी की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), अपराध जांच विभाग (सीआईडी) और हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच चल रही है। उन्होंने दावा किया कि इन कथित अनियमितताओं से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी सामने आए हैं।
उन्होंने कहा, "इन परिस्थितियों में मुझे भरोसा नहीं है कि आयोग पारदर्शी और ईमानदार तरीके से परीक्षाएं तथा भर्तियां करा सकता है। कई नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों ने भी इसी तरह की चिंताएं जताई हैं।" कुमारस्वामी ने बताया कि आयोग में सुधार के सुझाव देने के लिए पूर्व मंत्री आर.वी. देशपांडे की अध्यक्षता में गठित समिति ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे माहौल में परीक्षा आयोजित करने से ईमानदार और मेधावी उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने मांग की कि आयोग की पूरी तरह सफाई और पारदर्शिता बहाल होने के बाद ही परीक्षाएं कराई जाएं।
केंद्रीय मंत्री ने सूखे की स्थिति के बावजूद किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं करने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसान फसल बीमा का प्रीमियम भरने के बावजूद बीमा कंपनियों की ओर से कथित तौर पर ठगे जा रहे हैं। वहीं, राज्य सरकार फसल बीमा के लिए अपना निर्धारित अंशदान जारी करने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाने के बजाय केवल घोषणाएं कर रही है।
कुमारस्वामी ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पर पूरे हो चुके कार्यों के लिए ठेकेदारों का 39,000 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि दूसरी ओर नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की घोषणा की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बस किराया बढ़ोतरी को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ने के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किसानों को 2,500 रुपये मुआवजा देने की घोषणा की, ताकि बस किराया वृद्धि के मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों का भारी बकाया होने के बावजूद कर्नाटक कैबिनेट ने 26,000 करोड़ रुपये की सड़क विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
कुमारस्वामी ने कहा, "पहले से पूरे हो चुके कार्यों का भुगतान किए बिना नई परियोजनाओं की घोषणा करना हास्यास्पद है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पैकेज आधारित ठेका प्रणाली शुरू की है, जिसके तहत स्थानीय ठेकेदारों को दरकिनार कर आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश की कंपनियों को काम दिए जा रहे हैं। इससे कर्नाटक के ठेकेदारों के बैंक खाते एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) की श्रेणी में जा रहे हैं।
कुमारस्वामी ने कांग्रेस नेताओं पर रामनगर में चिकित्सा संस्थानों और परियोजनाओं का श्रेय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब वह 2006 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को रामनगर स्थानांतरित करने का फैसला लिया था और इसके लिए धन भी आवंटित किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता अब इस पहल को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कनकपुरा में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की मंजूरी जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार के कार्यकाल में दी गई थी। चामुंडेश्वरी और हरोहल्ली स्थित दयानंद सागर मेडिकल कॉलेजों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये निजी संस्थान हैं और इन्हें स्थापित करने में कांग्रेस नेताओं का कोई योगदान नहीं है।
इस बीच, कुनिगल विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस के 20 से अधिक प्रमुख नेता कुमारस्वामी और पूर्व मंत्री डी. नागराजैया की मौजूदगी में जेडीएस में शामिल हो गए। कांग्रेस छोड़कर जेडीएस में शामिल होने वालों में पूर्व जिला पंचायत सदस्य केम्पेगौड़ा, शिवशंकर, नारायणप्पा, केम्पाहनुमैया, सुरेश, जेसीबी गिरीश, लक्ष्मण, रेणुकैया, नंजेगौड़ा, रामकृष्णप्पा, वसंतराजू, सुरेश, मनु, शिवकुमार, नागन्ना, गंगन्ना, रमेश और शिवन्ना शामिल हैं। इस अवसर पर कुनिगल के वरिष्ठ नेता रवि और जगदीश तथा ग्रेटर बेंगलुरु जेडीएस अध्यक्ष एच.एम. रमेश गौड़ा भी मौजूद रहे।
--आईएएनएस
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