यूएन ने 3.45 बिलियन डॉलर के कम बजट और 19 प्रतिशत नौकरियों में कटौती के साथ की 2026 की शुरुआत
संयुक्त राष्ट्र, 1 जनवरी (आईएएनएस)। दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय संस्था संयुक्त राष्ट्र इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है। इसी कारण साल 2026 की शुरुआत वह 3.45 अरब डॉलर के कम बजट और 19 प्रतिशत नौकरियों में कटौती के साथ कर रही है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने उस बजट को मंजूरी दी है, जो महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रस्ताव पर आधारित है। हालांकि यह बजट उनके सुझाए गए 3.238 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक है।
इस साल का बजट 2025 के 3.72 अरब डॉलर से लगभग 270 मिलियन डॉलर, या 7.25 प्रतिशत कम है। यह बजट केवल संयुक्त राष्ट्र के मुख्य प्रशासनिक कार्यों के लिए है। शांति मिशनों और अन्य संस्थाओं जैसे यूनेस्को और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बजट अलग-अलग तय किए जाते हैं।
नियमित बजट में भारत की हिस्सेदारी 1.016 प्रतिशत है। यह हिस्सेदारी सकल राष्ट्रीय आय, जनसंख्या और अन्य कई मानकों के आधार पर तय की जाती है।
इससे पहले, बजट से संबंधित महासभा की पांचवीं समिति को संबोधित करते हुए, सहायक महासचिव चंद्रमौली रामनाथन ने कहा कि खर्च में कटौती के तहत शुक्रवार से 2,900 पद खत्म किए जाएंगे। इसके अलावा करीब 1,000 कर्मचारी स्वेच्छा से सेवा छोड़ने पर सहमत हो चुके हैं।
193 सदस्य देशों के बीच लंबी और कठिन बातचीत के बाद बजट तैयार हुआ। इस प्रक्रिया पर रामनाथन ने कहा कि यह एक असाधारण उपलब्धि है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, एक दिसंबर तक बकाया राशि 1.586 अरब डॉलर थी। इसमें 2024 के 709 मिलियन डॉलर और 2025 के लिए 877 मिलियन डॉलर शामिल हैं। इसी कारण रामनाथन ने सदस्य देशों से अपील की है कि वे 2026 का बकाया योगदान जल्द से जल्द जमा करें।
बजट को सर्वसम्मति से पारित किए जाने से पहले दो संशोधनों को खारिज कर दिया गया। एक संशोधन रूस की ओर से था, जो सीरिया में मानवाधिकार उल्लंघन की जांच से जुड़ा था। दूसरा संशोधन क्यूबा की ओर से था, जो नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े महासचिव के सलाहकार की भूमिका पर केंद्रित था। भारत ने इन दोनों संशोधनों पर मतदान से दूरी बनाए रखी।
संयुक्त राष्ट्र में सबसे बड़ा योगदान संयुक्त राज्य अमेरिका का है, जिसकी हिस्सेदारी 22 प्रतिशत है। इसके बाद चीन आता है, जिसका योगदान 20 प्रतिशत है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र के मुखर आलोचक रहे हैं। उनके कार्यकाल में अमेरिका ने 2025 के लिए अपनी स्वीकृत राशि अब तक जारी नहीं की, जिससे संगठन की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो गई।
ट्रंप ने अगले साल के नियमित बजट में अमेरिका के योगदान को 610 मिलियन डॉलर तक घटाने का प्रस्ताव भी रखा है। यदि ऐसा हुआ, तो हाल ही में मंजूर किया गया यह बजट आगे चलकर टिकाऊ रह पाएगा या नहीं, इस पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
--आईएएनएस
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