अहम खनिजों से समृद्ध छह विकासशील देशों की मदद के लिए यूएन की नई पहल, बढ़ेगा रोजगार
संयुक्त राष्ट्र, 24 सितंबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने खनिज संसाधनों से समृद्ध विकासशील देशों की मदद के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की है। इसका मकसद क्लीन एनर्जी के लिए जरूरी खनिजों की बढ़ती मांग का फायदा स्थानीय रोजगार और औद्योगिक विकास के रूप में इन देशों तक पहुंचाना है।
शुरुआत में इस पहल के तहत छह देशों को मदद के लिए चुना गया है। संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को न्यूयॉर्क में घोषणा की कि गिनी, इंडोनेशिया, मेडागास्कर, नाइजीरिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे इस कंट्री सपोर्ट मैकेनिज्म ऑन क्रिटिकल एनर्जी ट्रांजिशन मिनरल्स का फायदा पाने वाले पहले देश होंगे।
इस पहल के जरिए इन देशों को तकनीकी मदद दी जाएगी। साथ ही बेहतर नियम और व्यवस्था बनाने, अपने देश में ही ज्यादा खनिजों की प्रोसेसिंग करने और स्थानीय समुदायों तथा पर्यावरण की सुरक्षा करने में मदद की जाएगी।
गुटेरेस ने कहा, "जिन देशों के पास एनर्जी ट्रांजिशन के लिए जरूरी महत्वपूर्ण खनिज मौजूद हैं, फायदा सबसे पहले उन्हीं देशों को मिलना चाहिए।"
यह पहल खनिज संसाधनों से भरपूर देशों के सामने मौजूद एक बड़ी चुनौती पर ध्यान देती है। सवाल यह है कि ये देश क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल होने वाले खनिजों से होने वाली कमाई और आर्थिक फायदे का बड़ा हिस्सा अपने यहां कैसे रख सकें, बजाय इसके कि वे सिर्फ कच्चा माल सप्लाई करने वाले देश बने रहें।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, कॉपर, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स का इस्तेमाल कई आधुनिक तकनीकों में होता है। इनमें विंड टर्बाइन, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी स्टोरेज सिस्टम शामिल हैं।
यूएन का अनुमान है कि दुनिया के रिन्यूएबल एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ने के कारण 2030 तक महत्वपूर्ण खनिजों की मांग लगभग तीन गुना हो सकती है।
इस नई व्यवस्था का नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और संयुक्त राष्ट्र विकास समन्वय कार्यालय करेंगे। इसमें संयुक्त राष्ट्र की अलग-अलग एजेंसियों और संस्थाओं की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाएगा।
यूएन के स्थानीय कार्यालयों के जरिए काम करने वाली टीमें हर देश की जरूरतों को पहचानेंगी और उसी के हिसाब से मदद की व्यवस्था करेंगी। प्राथमिकताओं में गवर्नेंस, स्थानीय प्रोसेसिंग, औद्योगिक विकास और पर्यावरण व मानवीय सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
यह काम महासचिव के 'क्रिटिकल एनर्जी ट्रांजिशन मिनरल्स' पर बने पैनल द्वारा विकसित सिद्धांतों और सिफारिशों के अनुसार किया जाएगा।
जाम्बिया के विदेश मंत्री मुलाम्बो हैम्बे ने कहा कि उनका देश सिर्फ तांबे का उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहता। वह चाहता है कि इन संसाधनों से ज्यादा आर्थिक फायदा देश के अंदर ही पैदा हो।
उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि जाम्बिया के लोग दुनिया में क्लीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी की ओर हो रहे बदलाव में पूरी तरह भागीदार बनें, न कि सिर्फ कच्चा माल सप्लाई करने वाले बने रहें।"
हैम्बे ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर प्रशासन, निवेश और मजबूत साझेदारी की जरूरत होगी। इससे खनिज संसाधनों वाले देश पूरी सप्लाई चेन में अपनी भूमिका बढ़ा सकेंगे।
यूएनडीपी के प्रशासक अलेक्जेंडर डी क्रू ने कहा कि खनिज संपदा किसी देश की अर्थव्यवस्था को बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकती है, लेकिन इसके लिए आर्थिक फायदा बढ़ाना, पर्यावरण की सुरक्षा और अच्छी शासन व्यवस्था, तीनों को साथ लेकर चलना होगा।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि उनकी एजेंसी जिम्मेदार तरीके से खनिज हासिल करने, पर्यावरण की सुरक्षा और संसाधनों को ज्यादा से ज्यादा दोबारा इस्तेमाल करने के तरीकों पर अपनी विशेषज्ञता देगी। यह नई व्यवस्था क्लीन एनर्जी के लिए जरूरी खनिजों पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एक बड़ी टास्क फोर्स का हिस्सा है।
संयुक्त राष्ट्र की घोषणा में नई व्यवस्था के तहत मिलने वाली तकनीकी और संस्थागत मदद की जानकारी तो दी गई है, लेकिन इसके लिए कितनी रकम उपलब्ध कराई जाएगी, इसका कोई आंकड़ा नहीं बताया गया है।
--आईएएनएस
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