चुनाव चिह्न विवाद पर उद्धव ठाकरे ने सिब्बल का किया समर्थन, कहा- चोरी की संपत्ति से शासन नहीं चलने देंगे
मुंबई, 8 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गुट पर तीखा हमला करते हुए सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील कपिल सिब्बल की दलील का समर्थन किया। सिब्बल ने मांग की थी कि अगर पार्टी की पहचान पर अंतिम फैसले में और देरी होती है, तो अविभाजित पार्टी के चुनाव चिह्न 'धनुष-बाण' को फ्रीज कर दिया जाए।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने सिब्बल के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि जिन लोगों ने पार्टी, उसका नाम और उसका चुनाव चिह्न 'चुराया' है, उन्हें उस चोरी की संपत्ति का इस्तेमाल करके सत्ता मजबूत करने और गलत तरीके से शासन करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, "इस कानूनी लड़ाई में चार साल बीत चुके हैं। दो बड़े चुनाव, नगर निगम चुनाव और जिला परिषद चुनाव हो चुके हैं, जबकि यह मामला तारीख-दर-तारीख खिंचता जा रहा है। इन देरी का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है। सत्ता बनाए रखने के लिए चुनाव चिह्न का उनका गलत इस्तेमाल रोका जाना चाहिए।"
ठाकरे ने कहा कि नाम और चुनाव चिह्न पर उनकी पार्टी का ही हक है। उन्होंने दोहराया कि मौजूदा शासक शासन चलाने में अक्षम हैं और यह विवाद कभी पैदा ही नहीं होना चाहिए था। हमें अपना नाम और चुनाव चिह्न बनाए रखने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की नौबत ही नहीं आनी चाहिए थी।
भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) पर निशाना साधते हुए उन्होंने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "ईसीआई हमारी पार्टी के संविधान की जांच कर रहा है, लेकिन फर्जी राजनीतिक पार्टियों, जैसे नरोदा में एक ही ऑफिस शेयर करने वाली छह पार्टियां, जिनके पास 620 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति है, की ओर आंखें मूंदे हुए हैं। क्या ईसीआई उनके संविधानों की ऑडिट कर रहा है, या हमें यह मान लेना चाहिए कि आयोग उन चंदे में भागीदार है?"
एकनाथ शिंदे के इस बयान का खंडन करते हुए कि चुनाव चिह्न को फ्रीज करना 'बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को फ्रीज करने' के बराबर है, ठाकरे ने कहा, "शिंदे और उनके साथी 'फ्रीज्ड माइंड' (जड़ बुद्धि) वाले लोग हैं। मैं उन्हें गौशाला भेजने के लिए नहीं कहूंगा, क्योंकि मवेशी भी मानवता के काम आते हैं। इन जड़ बुद्धि वाले चोरों ने 'धनुष-बाण' पर बात करने का नैतिक अधिकार खो दिया है।"
पार्टी के अंदरूनी मामलों के अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री ने अहम सार्वजनिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी बात की। त्योहारों के दौरान तेज आवाज वाले डीजे साउंड सिस्टम से होने वाली परेशानी पर टिप्पणी करते हुए ठाकरे ने पाबंदियों का समर्थन किया और कहा, ''हर कोई त्योहार मनाना चाहता है, लेकिन कोई भी असहनीय शोर-शराबा या प्रदूषण नहीं चाहता।''
ठाकरे ने गणेशोत्सव और दही हांडी जैसे बड़े त्योहारों के दौरान तेज आवाज वाले डीजे साउंड सिस्टम पर प्रतिबंध लगाने का पुरजोर समर्थन किया और इसके बजाय पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों के इस्तेमाल की वकालत की। ठाकरे ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने त्योहारों को भारत की आजादी की लड़ाई के लिए एक जन-आंदोलन में बदल दिया था, जो बाद में बड़े सार्वजनिक उत्सवों में बदल गए। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि ये उत्सव शोर-शराबे और उपद्रव में नहीं बदलने चाहिए।
ठाकरे ने कहा, "हमारे त्योहारों की पवित्रता बनी रहनी चाहिए; भारी अफरातफरी और शोर-शराबे की कोई जरूरत नहीं है। त्योहार लोगों में खुशी लाने के लिए होते हैं, न कि परेशानी पैदा करने के लिए। लोग जश्न मनाना चाहते हैं, लेकिन वे बहुत ज्यादा शोर से होने वाली परेशानी नहीं चाहते।"
ठाकरे ने सवाल किया कि जब पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र आसानी से उपलब्ध हैं, तो बड़े-बड़े स्पीकर और डेसिबल-मॉनिटरिंग के जटिल नियमों की क्या जरूरत है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि वे जबरदस्ती करने के बजाय बातचीत के जरिए त्योहार समितियों और मुख्य हितधारकों के साथ मिलकर स्पष्ट समय-सीमा और उचित दिशा-निर्देश तय करें।
--आईएएनएस
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