जब सरकार जनहित में काम करना बंद कर दे तो उसे बदल देना चाहिए: उद्धव ठाकरे
मुंबई, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को मुंबई के ऐतिहासिक छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में आयोजित पार्टी की वार्षिक दशहरा रैली के दौरान महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए किसानों की परेशानी से लेकर सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों तक कई गंभीर विषयों को उठाया।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "हम यहां सत्ता बदलने आए हैं। जब कोई सरकार जनहित में काम करना बंद कर दे तो उसे बदल देना चाहिए।"
उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को सुनियोजित तरीके से दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सरकार नागरिकों के वोट देने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के बुनियादी अधिकारों को छीन रही है। प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए बर्ताव को लेकर उन्होंने प्रशासन की आलोचना की और आरोप लगाया कि युवाओं और महिलाओं के साथ सख्ती और ज्यादती की गई है।
ठाकरे ने संबोधन की शुरुआत पारंपरिक अभिवादन के साथ करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से मजबूती और निडरता के साथ खड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "मुर्गीखाने में बंद मुर्गियों की तरह जीवन मत जियो। भले ही एक दिन के लिए जियो, लेकिन बाघ की तरह जियो।"
उन्होंने यह भी कहा कि न तो उनकी पहचान और न ही उनका पवित्र भगवा ध्वज कोई छीन सकता है। कृषि संकट को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए ठाकरे ने सवाल उठाया कि भारी बारिश और बेमौसम बरसात से प्रभावित किसानों को वास्तव में कितनी राहत दी गई है।
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा बड़े राहत पैकेज देने के बड़े-बड़े दावों के बावजूद किसानों को न के बराबर या कोई मदद नहीं मिली है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि 'नमो किसान योजना' की किस्तें लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पाईं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य सरकार ने बस "किसानों के मुंह पर पांच हजार रुपए फेंक दिए हैं।"
उन्होंने गंभीर आर्थिक तंगी का जिक्र करते हुए एक ऐसी घटना बताई, जहां स्कूल के टूर के लिए पैसे न होने के कारण एक युवक ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने राज्य प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि यह सरकार पूरी तरह से खोखले वादों और कर्ज माफी के अधूरे वादों पर टिकी है।
--आईएएनएस
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