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शी जिनपिंग और पुतिन के साथ त्रिपक्षीय बैठक चाहते हैं ट्रंप, परमाणु निरस्त्रीकरण होगा मुख्य एजेंडा

 

वाशिंगटन, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ तीन-पक्षीय बैठक करने की इच्छा जताई है। इस बैठक का मुख्य विषय परमाणु हथियारों में कमी और परमाणु निरस्त्रीकरण हो सकता है। यह बैठक ट्रंप की अगले महीने प्रस्तावित चीन यात्रा के दौरान भी हो सकती है।

सोमवार को व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह ऐसी त्रिपक्षीय बैठक के लिए तैयार हैं। हालांकि, उनका मानना है कि बैठक का मुख्य फोकस रूस-यूक्रेन युद्ध नहीं, बल्कि परमाणु हथियारों को कम करने का मुद्दा होना चाहिए।

ट्रंप ने कहा, "मैं यह बैठक करने को तैयार हूं, लेकिन यूक्रेन के लिए नहीं। हम इसे परमाणु निरस्त्रीकरण पर बात करने के लिए करेंगे।"

राष्ट्रपति की यह टिप्पणी उन खबरों के बाद आई है, जिनमें कहा गया था कि पुतिन ने नवंबर में चीन के शेन्जेन में होने वाले 'एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन' (ऐपेक) शिखर सम्मेलन के दौरान रूस, चीन और अमेरिका के नेताओं की बैठक का प्रस्ताव दिया है।

हालांकि, अभी तक ऐसी किसी शिखर बैठक की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। तीनों देशों ने न तो किसी साझा एजेंडे की पुष्टि की है और न ही परमाणु वार्ता की कोई समय-सारणी तय होने की बात कही है।

ट्रंप ने कहा कि वह मॉस्को और बीजिंग, दोनों के साथ परमाणु हथियारों में कटौती पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार, यह दुनिया की सबसे गंभीर सुरक्षा चुनौतियों में से एक से निपटने का अवसर हो सकता है।

ट्रंप पहले भी कई बार यह इच्छा जता चुके हैं कि अमेरिका, रूस और चीन के बीच परमाणु हथियारों को लेकर कोई समझौता हो। हालांकि, तीनों देशों के परमाणु हथियारों की संख्या और क्षमता में काफी अंतर है।

अमेरिका और रूस के पास दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हथियार भंडार हैं, जबकि चीन पिछले कुछ वर्षों में अपनी परमाणु क्षमता बढ़ा रहा है।

ट्रंप ने कहा कि चीन अभी भी अमेरिका और रूस से पीछे है, लेकिन वह तेजी से अपनी ताकत बढ़ा रहा है।

उनकी यह टिप्पणी कुछ दिन पहले दिए गए 15 अक्टूबर के एक इंटरव्यू के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका पहले से ही रूस और चीन के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण पर बातचीत कर रहा है।

ट्रंप ने माना कि किसी समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। खास तौर पर इसलिए क्योंकि चीन के पास अमेरिका और रूस की तुलना में कम परमाणु हथियार हैं और वह शायद समान नियमों या प्रतिबंधों को स्वीकार करने के लिए तैयार न हो।

चीन पहले भी तीन देशों के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता के प्रस्ताव का विरोध कर चुका है। उसका कहना है कि उसका परमाणु भंडार अमेरिका और रूस से काफी छोटा है, इसलिए उसे उन्हीं शर्तों पर बातचीत में शामिल करना उचित नहीं होगा।

पिछले सप्ताह चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर यही रुख दोहराते हुए कहा कि मौजूदा समय में बीजिंग से तीन-पक्षीय परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता में शामिल होने की उम्मीद करना न तो उचित है और न ही व्यावहारिक।

यह संभावित बातचीत ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया में परमाणु हथियार नियंत्रण से जुड़े समझौतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है।

न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी इस साल की शुरुआत में समाप्त हो गई। इसके बाद अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों की संख्या पर कानूनी रूप से लागू सीमाएं खत्म हो गईं। इस समझौते के तहत दोनों देशों को अधिकतम 1,550 तैनात रणनीतिक परमाणु हथियार रखने की अनुमति थी और परमाणु हथियार ले जाने वाले सिस्टमों पर भी कुछ सीमाएं लागू थीं।

हथियार नियंत्रण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसकी जगह कोई नया समझौता नहीं होता, तो परमाणु शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है और उनके हथियार भंडार को लेकर पारदर्शिता भी कम हो सकती है।

आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डैरिल किम्बल ने सोमवार को कहा कि किसी भी सार्थक बातचीत के लिए ठोस प्रस्ताव और लंबे समय तक जारी रहने वाले कूटनीतिक प्रयास जरूरी होंगे।

रूस ने संकेत दिया है कि ट्रंप और शी की संभावित बैठक में यूक्रेन संघर्ष पर भी चर्चा हो सकती है। वहीं, यूक्रेन के अधिकारियों ने चिंता जताई है कि अगर उनके देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होती है, तो कीव की भागीदारी भी होनी चाहिए।

हालांकि, ट्रंप की ताजा टिप्पणियों से यह साफ है कि वह किसी भी तीन-पक्षीय बैठक में परमाणु हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण को सबसे अहम मुद्दा बनाना चाहते हैं।

--आईएएनएस

एवाई/एएस